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कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 17

( १४ ) बीजककी-अनुक्रमणिका ।
विषय. पृष्ठ.
बोली एक अमोलहै .... .... ६२५
करबहियां बल आपनो *
वोहतो वैसही भया.... .... ६२६
नोमतवारे राम के *
साधू होना चाहहु जो ... ६२६
सिंहैं केरी खोलरी ... ... ६२६
ज्यहिखोजत कल्पौगया ... ६२७
दश द्वारेका पींजरा... .... ६२७
रामहि सुमरहिं रण भिरे ... ६२७
खेत भला बीजो भला ... ६२७
गुरु सीढी ते ऊतरे ... ६२७
आगि जो लागी समुद्रमें ... ६२८
जो मोहि जाने त्यहि मैं जानौं ६२८
मौन मिला सो गुरु मिला ६२८
जहं गाहक तहँ हौं नहीं ... ६२९
शब्द हमारा आदिका .... ६२९
नग पषान जग सकलहै ... ६२९
ताहि न कहिये पारखी ... ६३०
सारि दुनिया विनशती ... ६३०
सपने सोया मानवा... ... ६३०
नष्टेका यह राज्य है .... ६३१
दृष्टमान सब वीनशै... ... ६३१
१ इस साखी तक तो साखियोंका
कर्म निकटही निकट मिलता जुलता
आया है पूर्ण साहबकी टीकाके साथ,
किन्तु यहांसे आगे बहुत गड बड
होगया है ।
विषय. पृष्ठ.
दृष्टिहि माँहि विचार है ... ६३१
जब लगढोला तब लग बोला ६३२
करु बन्दगी विवेक की ... ६३२
सुरनर मुनि और देवता ... ६३२
जौलंग दिलपर दिल नहीं ... ६३२
यंत्र बजावत हौं जुना ... ६३३
जो तुम चाहो मुझको ... ६३३
साधु भया तो क्या भया ... ६३३
हंसाके घट भीतरे ... ... ६३३
मधुर वचन है औषधि ... ६३४
ई जगतो जहडे गया ... ६३४
ठाढसदेखुमरजीवको .... ६३४
ऐ मरजीवा अमृत पीवा ... ६३५
के तेबुन्दहलफेगये ... ... ६३५
आगि जो लगी समुद्रमें .... ६३५
साँचे शाप न लागई... ... ६३५
पूरा साहब सेइये ... ... ६३६
जाहु वैद्य घर आपने ... ६३६
औरन के समु झावते ... ६३६
मैं चितवत हौं तोहिको ... ६३६
तकत तकावत तकिरहे ... ६३७
जस कथनी तस करनीजो ... ६३७
अपनी कहै मेरी सुने ... ६३७
देशदेश महँ बागिया ... ६३८
लोहे चुम्बक प्रीति जस ... ६३८
गुरू बिचारा क्या करे ... ६३८
दादा बाबा भाईके लेखे ... ६३८
लघुताई सब ते भली ... ६३९