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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 169

रमैनी । (११९)
प्रमाण ॥ (येनाश्रुतंश्रुतंभवत्यमतंमतमविज्ञातं विज्ञातं भवति) ॥तहां दिठियार जे
साहबके देखनवारे ते वोई श्रुतिनमें साहबमुख अर्थ देखैहैं कैसे जैसे येनाश्रुतं
श्रुतं कहे जौने रामनामके सुने जो नहीं सुनाहै सोऊसुनै असहोइजाइहै काहेते
वेदशास्त्र पुराणादि रामनामहीते निकसे हैं औ जौने रामनामके जानेते यह जो
असत्य है सर्वत्र ब्रह्ममानिबो धोखा सो मत होइ जाइहै अर्थात् परमपुरुष
श्रीरामचन्द्रको चितअचित विग्रही सब को माने है औ मन बचनके परे जे
अविज्ञात साहब ते रामनाम साहबमुख अर्थ में व्यंजित होयहै अथवा रामना-
मको जानिकै साधन किहेते साहब हंसरूप दै तब जाने जाइहै ॥ ४ ॥
यहिविधिकहौँमानुजोकोई । जसमुखतसजोहृदयाहोई॥५॥
कहहिंकवीरहंसमुसकाई । हमरे कहले छुटिहौ भाई ॥ ६ ॥
सो याभांतिते मैं सब जीवनको समुझाऊं हौं पैकोई बिरला मानैहै कौन
मानैहै जौन जस मुखते कहैहै तैसे हृदयते होइहै ॥ ५ ॥ कबीरजी कहैहैं कि
मुसकाई मुसकैंबंधी जीवोहमारेही कहेते तुम छूटौगे औरि भांति न छूटौगे
मुकुताई पाठहोय तौ याअर्थ मुक्तिहोबेकीहैइच्छाजिनके ॥ ६ ॥
इति बयालीसवीं रमैनी समाप्त।
अथ तेंतालीसवीं रमैनी।
चौपाई ।
जिनाजिवकीन्हआपुविश्वासा।नरकगयेतेहिनरकहिवासा १
आवत जात न लागहि वारा।कालअहेरी सांझ सकारा॥२॥
चौदहिविद्यापढ़ि समुझावै।अपनेमरनकि खबरि न पावै३॥
जाने जिवको परा अंदेशा । झूठ आनिकै कहै संदेशा॥४॥
संगतिछोड़ि करै असरारा । उबहै मोट नरककी धारा॥५॥