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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 168

( ११८ ) बीजक कबीरदास ।
अथ बयालीसवीं रमैनी ।
चौपाई ।
जबहमरहल रहानहिंकोई । हमरेमाहँरहलसबकोई ॥ १ ॥
कहहुसोरामकवनतोरसेवा। सोसमुझायकहौ मोहिंदेवा ॥२॥
फुरफुरकहउँ मारुसबकोई । झूठे झूठा संगति होई ॥ ३ ॥
आंधर कहै सबै हमदेखा।तहँ दिठियारपैठिमुँहपेखा ॥ ४ ॥
यहिविधिकहौमानुजोकोई। जसमुखतसजोहृदयाहोई॥५॥
कहहिं कबीरहंसमुकुताई । हमरे कहले छुटिहौभाई ॥ ६ ॥
जबहम रहलरहानहिंकोई । हमरेमाहँरहलसबकोई ॥१॥
कहहुसोरामकौनतोरसेवा।सोसमुझायकहौ मोहिंदेवा ॥ २॥
श्रीकबीरजी कहैं हैं कि जबहम साहबके लोकमें रहे हैं तबतुम कोई नहीं
रहेहौ तुमसब हमरे साहबके लोकमकाशमें रहेहौ ॥ १॥ अपनेको रामतौ कहौहौ
तुम्हारीसेवाकौनहै कहां वेदपुराणमें लिखोहै कि इनकी सेवा किये मुक्तिहोइगी
सो तुमदेवता बने फिरौहौ परन्तु मोको समुझायके कहौतौ कौन मुनि
तुम्हारी सेवा कियो है काकी मुक्ति भई है ॥ २ ॥
फुरफुर कहउँमारुसब कोई । झूठेझूठासंगतिहोई ॥ ३ ॥
जों कोई फुरफुर कहैहै तौ सब मारनधावैहै अर्थात् जो कोई कहैहै कि तुम
साचहौ साहबकेहौ तौ मारन धावै है शास्त्रार्थ करि लैहै काहेते लोकमें
रीतिहै कि झूठेकी झूठेनसो संगतिहोयहै सो सांच जो जीव सो झूठामन उत्प-
त्तिकरिकै झूठा जो धोखाब्रह्म ताहीके संग होत भये ॥ ३ ॥
आंधरकहैसबैहमदेखा । तहँदिठियारपैठिमुँहपेखा ॥ ४ ॥
साहबके ज्ञानते बिहीन जे आंधर हैं ते याकहै हैं कि वेदशास्त्र पुराणमें
अर्थ सबहम ब्रह्मरूपई देखा है जाके देखेते सबको ज्ञान हमको ह्वैगयो तामें