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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 165

रमैनी । ( ११५ )
अथ चालीसवीं रमैनी ।
चौपाई ।
आदम आदि सुद्धि नहिंपावा।मामाहौवा कहँ ते आवा॥ १ ॥
तबहोते न तुरुक औ हिन्दू।मायके रुधिर पिताकेविन्दू॥२॥
तवनहिंहोते गाय कसाई।कहुबिसमिल्लहकिनफुरमाई॥३॥
तवनरहोहै कुलऔजाती।दोजकभिस्तकहां उतपाती॥४॥
मनमसलेकीख़वरि न जानै।मतिभुलानदुइदीनवखानै॥५॥
साखी ॥ संयोगे का गुनरवै, विनयोगे गुणजाय ॥
जिह्वास्वादकेकारणे, कीन्हे वहुत उपाय ॥ ६ ॥
आदमआदिसुद्धिनहिंपावा । मामाहौवाकहँते आवा ॥१॥
तबहोते न तुरुक औ हिंदू । मायकेरुधिरपिताकेविंदू॥२॥
आदि आदम जे ब्रह्मा ते मामाकहे जगतपिता हौवा नामऐसी जो वाणी
ब्रह्माकी नारी सो ब्रह्माही सुधि ना पायो कि कहां ते आई है ॥ १ ॥ तब
आदिमें न हिंदू रहे न तुरुक रहे औ मायके रुधिरते पिताके बिंदुते गर्भ
होइहै सोऊ नहीं रह्यो ॥ २ ॥
तवनहिंहोतेगायकसाई । कहुबिसमिल्लहकिनफुरमाई ॥३॥
तवनरहोहैकुल औजाती । दोजकभिस्तकहांउतपाती॥४॥
मनमसलेकीखवरिनजानै।मतिभुलानदुइदीनवखानै ॥५॥
तब न गाइ रही न कसाई रहे सो जो बिसमिल्ला कहिकैहलाल करै है
सो किन फुरमांईहै ॥ ३ ॥ अरु तब न कुलरह्यो औ न जाति रही दोजक
भिस्त कहांरहोहै ॥ ४ ॥ मनके मसलेकी सुधि न जान्यो कि ई मेरेमनके
बनाये हैं दोनोंदीन । औ अपने आत्माको मत न जान्यो कि यह न
हिंदू हैं न मुसलमान है मतिहीन दुइदीन बखानत भये ॥ ५ ॥