कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ११४ ) बीजक कबीरदास ।
करमतसो जो गर्भऔतरिया। करमत सोजोनामहिंधररिया ३
करमत सुन्नति और जनेऊ । हिंदू तुरुक न जानै भेऊ ॥४॥
साखी ॥ पानीपवन सँजोयकै, रचिया ई उतपात ॥
शून्यहिंसुरतिसमानिया, कासोकहियेजात ॥५॥
जिन्हकलिमाकलिमाहँ पढ़ाया। कुदरतखोजितिन्हौंनाहिंपाया
कारिसतकर्मकरैक रतूती । वेदकिताब भया सबरीती ॥ २ ॥
जिन्ह महम्मद सबको कलियुगमें कलिमा पढ़ायोहै तेऊकह्योहै कि हम
अल्लाहके कुदरतको खोजकहे अंतनहीं पायो ॥ १ ॥ आपन आपन मतकरिकै
करतूति कैकै कर्म करनलगे सो वेदकिताब सबरीति हैजातभये ॥ २ ॥
करमतसोजोगर्भऔतरिया । करमतसोजोनामहिंधररिया ३
करमत सुन्नति और जनेऊ । हिंदू तुरुक न जानैभेऊ ॥४॥
कर्महिंते गर्भमें आय अवतार लेतेभये अरु कर्महीते नामधरतभये ॥ ३ ॥
औ कर्मैते सुन्नति औ जनेऊ चलतभयो ताको भेद हिंदू तुरुक दूनो न
जानत भये ॥ ४ ॥
साखी ॥ पानी पवन संजोयकै, रचिया ई उतपात ॥
शून्यहिंसुरतिसमानिया, कासोकहियेजात ॥५॥
पानी कहैविंदु अरुपवन ये दूनौके संयोग ते गर्भभयो कहे शरीररूपी उतपात
खड़ाभयो सो कर्म में लगे जन्म मरणादिक येते उतपात भये पै कर्म न छोड़
तभये अरु जिन कर्म छोड़िबोऊकियो तिनकी सुरति शून्यैंमें समाइ जाती
भई सो वहांकी बात कासों कही जातहै अर्थात् काहूसों नहीं कहिजातहै नेति-
नेतिकहिदेइ हैं अर्थात् उहां तौ शून्यहै कुछहाथ न लग्यो ॥ ५ ॥
इति उन्तालीसवीं रमैनी समाप्त ।