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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

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रमैनी । ( १०५ )
अथ चौंतीसवीं रमैनी ।
चौपाई ।
पढ़िपढ़िपंडितकरिचतुराई । निजमुक्तिहिंमोहिंकहहुबुझाई १
कहँवसै पुरुष कवनसोगाऊँ।सोम्वहिंपण्डितसुनावहुनाऊँ२
चारिवेद ब्रह्मा निज ठाना । मुक्तिक मर्म उन्हौं नहिंजाना ३
दानपुण्यउनबहुतबखाना । अपनेमरनकिखबरिनजाना४
एकनाम है अगम गँभीरा।तहँवाँ अस्थिर दास कबीरा ५
साखी ॥ चींटी जहां न चढ़ि सकै, राई नहिं ठहराय ॥
आवागमन कि गमनहीं तहँसकलौ जगजाय॥६॥
पढ़िपढ़िपंडितकरिचतुराई । निजमुक्तिहिमोहिंकहहुबुझाई १
कहँबसैपुरुष कवनसोगाउँ । सोम्वहिं पंडितसुनावहुनाउँ २
हे पण्डितौ ! पढ़ि पढ़ि के चतुराई करौहौ सो अपनी मुक्तितौ समुझाइ कहौ
कहां ते तिहारी मुक्तिहोइहै जौने को मुक्ति माने