सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

पृष्ठ 153, कुल 766 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 153

( १०२ ) बीजक कबीरदास ।
अथ तैंतीसवीं रमैनी ।
चौपाई ।
वेदकी पुत्री स्मृति भाई । सो जेवरि कर लेतै आई ॥ १ ॥
आपुहि बरी आपु गरबंधा । झूठी मोह कालको धंधा ॥ २ ॥
बँधवतबंध छोड़िना जाई । विषयस्वरूपभूलिदुनियाई ३
हमरेलखतसकलजगलूटा । दासकबीर रामकहिछूटा ॥ ४ ॥
साखी ॥ रामहि राम पुकारते, जीभ परिगोरोस ॥
मूधाजल पीवैनहीं, खोदिपियनकी होस ॥ ५ ॥
वेदकी पुत्री स्मृति भाई । सो जेवरि कर लेतै आई ॥ १ ॥
यहांकर्मकाण्ड उपासनाकाण्ड ज्ञानकाण्ड ये तीनोंकी कठिनतादेखाइ तात्पर्य
वृत्तितेछुड़ाइ साहबमें लगावैहै । कबीरजी कहै हैं कि हेभाइउजौनीस्मृतिको कर्म
प्रतिपादक अर्थकरि कर्मरूप जेवरीमें तुम बँधिगयेहै। स्मार्त्त भयेहौ सो स्मृति
वेदकी पुत्री है तौने वेदहीको अर्थ तुम नहीं जानतेहौ धौं वाको तात्पर्य कर्म
के छुड़ाइबेमें है धौंकर्मके बांधिबेमें है तौ स्मृतिको अर्थ कबजानोगे ? सो वेदकों
तात्पर्य तौ कर्मते छड़ायबेहीमेंहै कैसे जैसेजीवनकी मांसमें आसक्ति स्वभावहीतें
है वैसे छोड़वै तौ न छूटै ताते वेद नियम बंतावै है कि मांसखाय तौयज्ञमें
खाय ताते या आयो कि जब बहुत श्रमकारि बहुत द्रव्यलगाय यज्ञकरैगो तब
थोड़ामांस बिनास्वादका पावैगो तामें या बिचारैगोकि या थोड़ेमांसबिना स्वाद-
के खाये यामें कहैहै या बिचारि मांसछोड़ि देयगो याभांति कर्मकांडको तात्पर्य
निवृत्तिहीमेंहै औ स्मृति नाना देवतनकीउपासना कहैहैं सो उन पूजनकी यंत्र
मंत्रकी पुरश्चरणकी बिधि कठिनहै जोकरतमें सिद्धिभयो तौ उनके लोककों
गयों जो कछू बीच परिगयो तौ बैकलाइकै मरिजाइ है या भांति उपासना
काण्डको तात्पर्य निवृत्तिहीमें है औ स्मृतिज्ञानकाण्डजोकहैहैं सो मनको साधन