कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
DevanagariHindipublished766 पृष्ठ
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( १२ ) बीजककी-अनुक्रमणिका ।
विषय. पृष्ठ.
भैरोऊं सब जगत को .... ५९४
साहेब साहेब सब कहें ... ५९४
जिव बिन जिव बांचे नहीं ५९४
हमतो सबही की कही .... ५९४
प्रकट कहौं तो मारिया .... ५९५
देश विदेशन हौं फिरा ... ५९६
कलि खोटा जग आंधरा .... ५९६
मसि कागज छूवों नहीं ... ५९६
फहमें आगे फहमें पीछे ... ५९७
हद चले सो मानवा ... ५९७
समुझे की गति एक है ... ५९७
राह बिचारी क्या करे .... ५९७
मुआ है मरि जाहुगे बिन शिर-
थोथा भाल* ... ... ५९८
बोलि हमारी पूर्ब की ... ५९८
नेहि चलेतरवदे परा ... ५९८
पायन पुहुमी नापते .... ५९९
नव मन दूध बटोर के ... ५९९
केल्यो मनावैं पावपरी .... ६००
मानुष तेरा गुण बड़ा .... ६०१
जो मोहि जानै ताहि मैं जानौं । लोक
वेदका कहा न मानौं । *
- नोट—यह साखी इस टीकामें छोड
दी है.
मुआ है मारि जाहुगे मुये की बाजी
ढोल ।
सुपन सनेही जग भया, साहि दानी
रहिगो बोल ॥
विषय. पृष्ठ.
जौ लगि डोला तौ लागि बोला ६०१
सबकी उतपत्ती धरणि में ... ६०१
धरती जानत आपगुण .... ६०१
जहिया किरतिम ना हता ... ६०२
जँह बोल अक्षर नहि आया-
आया ... ... ६०२
जौ लो तारा जगमगै ... ६०२
नाम न जाने ग्रामको ... ६०३
संगति कीजे साधु की ... ६०३
संगति से सुख उपजे । *
जैसी लागी ओरकी .... ६०३
आज काल दिन एक में ... ६०३
करु बहियाँ बल अपनी .... ६०३
बहु बन्धन से बांधिया ... ६०४
जीव मत मारहु बापुरा ... ६०४
जीव घात ना कीजिये ... ६०४
तीरथे गये सो तीन जन .... ६०५
तीरथ गये ते बहि मुये ... ६०५
तीरथ भै बिष बेलरी ... ६०५
हे गुणवंती बेलरी ... ... ६०५
बेल कुठंगी फल बुरो ... ६०६
पानी ते अति पातला .. ६०६
सतगुरु वचन सुनो हो संतो ६०६
एकरुआइ बेलरी ... ... ६०६
सिद्ध भया तो क्या भया *
परदे पानी ढारिया ... ... ६०६ - इस पुस्तकमें यह साखी छोड दीहै।