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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 14

बीजककी-अनुक्रमणिका । ( ११ )
विषय. पृष्ठ.
चौ गोड़ा के देखते... ... ५७६
तीन लोक चोरी भई ... ५७६
चक्की चलती देखिके ... ५७७
चार चोर चोरी चले .... ५७७
बलिहारी वहि दूध की .... ५७८
बलिहारी तेहि पुरुष की .... ५७८
विषके विरवे घर किया ... ५७८
मोई घर है सर्पका ... .... ५७९
घुघुची भर जो बोइया * .... ५७९
मनभर के बोये कबौं .... ५७९
आपा तजो हरि भजो ... ५७९
पक्षा पक्षी कारने .... ... ५८०
माया त्यागे क्या भया ... ५८०
घुघुची भर जो वोइया ... ५८०
बड़ेते गये बडापने... .... ५८१
मायाकी झक जगजरै .... ५८१
मायाजग सांपिन भई .... ५८१
सांप बीछिको मंत्र है ... ५८२
तामस केरे तीन गुण .... ५८२
मनमतंग गैयर हने... ... ५८३
मन गयंद मानै नहीं ... ५८३
या माया है चूहरी ... ... ५८३
कनक कामिनी देखिके .... ५८३
मायाके वश सब परे ... ५८३
पीपर एक जो मंहगेमान .... ५८४
शाहू ते भौ चोरवा .... .... ५८४
ताकी पूरी क्यों परे... ... ५८४
विषय. पृष्ठ.
जाना नहीं बूझा नहीं ... ५८५
जाको गुरू है आंधरा ... ५८५
मानस केरी अथाइया ... ५८५
चारमास घन वरासिया ... ५८५
गुरु के भेला जिव डरै काया
छीजनहा .... ... ५८६
तन संशय मन सोनहा ... ५८६
शाहुचोर चीन्हे नहीं.... ... ५८६
गुरु सिकलीगर कीजिये ... ५८७
मूरखको समुझावते... ... ५८७
मूढ कर्मिया मानवा... .. ५८७
सेमर केरा सूवना ... .... ५८७
सेमर सुवना वेगितजु ... ५८८
सेमर सुवना सेइया ... ... ५८८
लोग भरोसे कौनके... ... ५८८
समुझि बूझ जड़ होइरहे ... ५८९
हीरा वही सराहिये... ... ५८९
हरि हीरा जन जौहरी ... ५९०
हीरा तहां न खोलिये ... ५९०
हीरा परा बजार में... ... ५९०
हीराकी ओबरी नहीं .... ५९१
अपने अपने शशि की ... ५९२
हाड़ जरै जस लाकड़ी ... ५९२
घाट भुलाना बाट बिन .... ५९२
मूरख सो क्या बोलिये ... ५९३
जैसे गोलि गुमज की ... ५९३
ऊपर की दोऊ गई ... ५९३
केते दिन ऐसे गये .... ५९३