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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 145

( ९४ ) बीजक कबीरदास ।
कि, हम अंत नहीं पाये ब्रह्माकह्यो हम अंत लै आये सुरभीके दूधते नहवाय
केतकीके फूलतेपूज्यो है सोसुरभी औ केतकी साखीहैं तब महादेवतीनोंको झूठा-
जानि तीनोंको शापदियो ब्रह्माको कह्यो लोकमें अपूज्यहोउ सुरभीको कह्यो
तुम्हारोमुख अशुद्धहोइ केतकीको कह्यो हमपर न चढ़ो औ विष्णुको प्रसन्न
ह्वैकै या कह्यो कि, तीन लोकमें पूज्य होउ तुम सत्य कह्योहै यह पुराणमें कथा
प्रसिद्धहै ॥ ३ ॥
तबअष्टंगीरचोकुमारी । तीनिलोकमोहनिसवझारी ॥ ४ ॥
द्वितीयानामपार्वतिभयऊ । तपकरताशंकरकोदयऊ ॥ ५ ॥
तबअष्टंगी जो कारणरूपाशक्ति सोप्रसन्न ह्वैकै तीनि लोककी मोहनहारी कुमारी
सती रचिकै तपकरता जेदक्षहैं तिनकेद्वारामहादेवजीको देतभई तौनेही को दूसरो
पार्वती नाम भयो ॥ ४ ॥ ५ ॥
एकैपुरुषएकहै नारी । ताते रचिनि खानि भै चारी ॥ ६ ॥
शर्मनबर्मनदेवोदासा । रजगुणतमगुणधरणिअकासा ॥ ७ ॥
एकै पुरुष जोहै ब्रह्म अरु एकै नारी जोहै माया ताते चारिखानिके जीव
उत्पत्ति होतभये अंडज पिंडज स्वेदज उद्भिज॥६॥औ शर्मन बर्मन देवो दासा
कहे शर्मन ब्राह्मण बर्मन क्षत्री देवो वैश्य दासा शूद्र अथवा शर्मन कहे श्रोता
बर्मन कहेवक्ता अरुदेवता औ उनकेदास रजोगुणी तमोगुणी औधरती औआ-
काश होतभये ॥ ६ ॥ ७ ॥
साखी ॥ यकअंड ॐकारते, सब जग भयो पसार ॥
कह कबीर सबनारिरामकी,अविचलपुरुषभतार८
मंगलमें पांच ब्रह्म पांच अंडमें राख्यो है या कहि आये हैं सो तामें
शब्द ब्रह्मरूप जोहै अंडप्रणव ता प्रतिपाद्य जो ब्रह्म सोमायासबलितहै इच्छा
आदि अष्टांगी उत्पन्नकै जगत् पैदाकियो है सो कबीरजी कहै हैं कि, धोखा
वही है प्रणवप्रतिपाद्य श्रीरामचन्द्रही हैं काहेते रामनामहीके जगतमुख अर्थते