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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 143

( ९२ ) बीजक कबीरदास ।
ऐसेही ब्रह्मादिक जे अनेकमत करिकै आपनेको कर्त्तामानि लिये हैं तिनकें संग
तुम न लागौ अर्थात् अनेक मतनमें तुम न परौ तुम साहब को जानो ॥ ५ ॥
साँचीबातकहौंमैंअपनी । भयादेवानाऔरकिसपनी ॥ ६ ॥
सो कबीरजी कहै हैं कि, सांचीबात मैं अपनी कहौंहौं अपनी कौनकी मैं
नाना मतनको छांड़ि साहबको जान्यो है सोतुम नहीं बूझौहै। और की सपनी
कहे स्वप्नवत् झूठी नानामतनकी वाणीमें देवाना कहे बिकल ह्वै रहेहौ हैं
जीवो ! सो नातामत त्यागि साहबको जानो कहे और की पुनि जो या पाठहोय
ताको अर्थ या है साँचोबात अपनी मैं कहताहूं जोमेरे मतमें साहबको जानता
है सोई साँचहै यासुनि पुनि और का जा भया सोई दिवाना ॥ ६ ॥
गुप्त प्रगट है एकै मुद्रा । काकोकहिये ब्राह्मणशूद्रा ॥ ७ ॥
झूठगर्व भूलै मतिकोई । हिंदू तुरुक झूठ कुल दोई ॥ ८ ॥
सो हेजीवौ! गुप्तकहे जब समष्टिमें रहे हौ तबहूं औ जबप्रगट कहे व्यष्टिमें रहेहौ
तबहूं एकही मुद्रारहेहौ अर्थात् साहिबै के रहे हौ तुम ने नाना मतनमें परि
नाना साहब मानि ब्राह्मण शूद्रकहतेहौ सो झूठेहौ जीवत्व तो एकही है ॥ ७॥
मैं हिंदूहौं मैं तुरुकहौं यह झूठो गर्वकरिकै मति कोई भूलौ विचारिकै देखौ
तौ हिंदू तुरुक कुल ये दोऊ झूठे हैं तुमतौ साहबके हौ ॥ ८ ॥
साखी ॥ जिन यह चित्र बनाइया, साचा सो सूत्रधार ॥
कहहिकविरतेइजनभले,चित्रवंतहिलेहिविचार ॥६॥
जिन यह नाना चित्र बनाइया कहे जिन यह जीवको मन नाना शरीर जगत्में
बनायो है तौनै को सूत्रधारी साहब साँचो है जोन सबको सुरतिदियो है सो
कबीरजी कहहै चित्रवंत जो या मन नानादेह देनेवालो याको जो कोई बिचा-
रिलियो कि या मिथ्याहै औ साँच साहब को जानिलियो ते जन भले हैं ॥६॥
इति छब्बीसवीं रमैनी समाप्ता ।