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कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 13

( १० ) बीजककी-अनुक्रमणिका ।
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साचा शब्द कबीर का ... ५५६ | काल खड़ा शिर उपरे ... ५६७
जो तू सांचा बानिया ... ५५७ | कायाकाठी कालघुन .... ५६८
कोठी तो है काठ की ... ५५७ | मन माया की कोठरी ... ५६८
सावन केरा मेहरा ... ... ५५७ | मन माया तो एक है ... ५६८
ढिग बूड़ा उसला नहीं ... ५५८ | बारी दिन्हो खेतमें ... .... ५६९
साखी कहैं गहैं नहीं ... ५५८ | मन सायर मनसा लहरी ... ५६९
कहता तो बहुते मिला ... ५५९ | सायर बुद्धि बनाय कै .... ५६९
एक एक निरुवारिये ... ५५९ | मानुष होके ना मुआ .... ५७०
जिह्वा को दै बन्धने ... ५५९ | मानुष तै बड़ पापिया ... ५७०
नाकी जिह्वा बन्द नहीं ... ५५९ | मानुष विचारा क्या करे कहे
पानी तो जित्ये ढिगे ... ५६० | न खुले कपाट ... ... ५७०
हिलगौ भाल शरीर में ... ५६० | मानुष विचारा क्या करे जाके
आगे सीढ़ी साँकरी... ... ५६० | शून्य शरीर .... ... ५७०
संसारी समय बिचारिया ... ५६० | मानुष जन्महिं पायके ... ५७१
संशय सब जग संधिया ... ५६१ | ज्ञान रतन को यतन करु ... ५७१
बोलना है बहु भांतिका .... ५६१ | मानुष जन्म दुर्लभ अह्रै ... ५७१
मूल गहेते काम है... ... ५६२ | बांह मरोरे जात हौ .... ५७२
भँवर बिलम्बे बाग में .... ५६२ | साखी पुलंदर ढह परे .... ५७२
भँवर नाल बगु जालु है .... ५६३ | बेरा वाधिन सर्प को ... ५७२
तीन लोक टीड़ी भई .... ५६३ | कर खोरा खोवा भरा ... ५७३
नाना रंग तरंग है ... ... ५६३ | एक कहौं तो है नहीं .... ५७४
बाजीगर का बांदरा ... ५६४ | अमृत केरी पूरिया .... .. ५७४
ई मन चंचल चोरई ... ५६४ | अमृत केरी मोटरी ... .... ५७४
विरह भुवंगम तन डसा ... ५६४ | जाको मुनिवर तप करें .... ५७५
राम वियोगी विकल तन .... ५६४ | एकते हुआ अनंत
... .... ५७५
विरह भुवंगम पैठिके ... ५६५ | एक शब्द गुरु देवका ... ५७५
करक करेजे गड़ि रही ... ५६६ | राडर को पिछुआरकै .... ५७५
काला सर्प शरीर में ... ५६६ |