कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
पृष्ठ 139, कुल 766 में से
संदर्भ में पढ़ें(८८) बीजक कबीरदास ।
चारि अवस्था सपनो कहई । झूठैफूरे जानत रहई ॥ २ ॥
मिथ्यावातनजानैकोई । यहिविधिसिगरेगयेविगोई ॥ ३ ॥
चारिअवस्थाजेहैं जाग्रत स्वप्न सुषुप्ति तुरिया ते सपनकहाती हैं तो झूठी
फुरि जानत रहै हैं॥२॥वह कैवल्य जो है पाँचईं अवस्था तद्रूप है जाइबो कि,
मैंहीं ब्रह्महौं सोमिथ्याहै यहबात कोई नहीं जानै है यहीविधि सिगरे जीव
बिगरिगये कहे बिगोइगये ॥ ३ ॥
आगे दैदै सबन गँवावा । मानुषबुद्धि न सपनेहुपावा॥ ४ ॥
चौंतिसअक्षरसौंनिक लैजोई । पापपुण्य जानैगासोई॥५॥
वहीधोखा ब्रह्मके आगे और कुछ नहीं रह्यो आदिकी उत्पत्ति वहीतेहै यही
बात आगे दैदै कहे विचारि कै सिगरे जे ऋषिमुनि हैं ते आजअपने स्वस्वरू-
पको गँवावतभये मनुष्यरूपजो मैं तिन के जाननेवाली बुद्धि सपन्यो न पावत-
भये ॥ ४ ॥ चौंतिसअक्षरके जो निकरैगा सोई पापपुण्यजानैगा मैं साहबको हौं
और मैं लागौंहौं सो पापै करौंहौं या बातमेरो अनिर्वचनीय निर्वाण जो नाम
है ताको जपिकै जानैगो और अपने स्वस्वरूप जानैगो ॥ ५ ॥
साखी ॥ सोइकहते सोइ होउगे, निकलि न बाहेरआउ ॥
हो हुजूरठाढ़ो कहौं, धोखे न जन्म गँवाउ ॥ ६ ॥
जोपदार्थ देखोगे जो सुनौगे जो कहैगे जो स्मरण करौगे संसारमें सोई
होउगे वही धोखामें लागिकै पुनिसंसारी होउगे वा में ते निकरिकै बाहर न
होउगे काहेते कि, वहतो अकर्त्ताहै तुम्हारी रक्षाकौन करैगो सो साहब कहै हैं
कि, सर्वत्र पूर्णहौं तेरे हुजूर ठाढ़ कहतई हौं कि, तैं मेरो है तू काहे धोखा ब्रह्म
में ईश्वरनमें जगतके नाना पदार्थमें लागिकै जन्मगँवाये देतहै ॥ ६ ॥
इति चौबीसवीं रमैनी समाप्त ।