कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ८६ ) बीजक कबीरदास ।
साखी ॥ भ्रमको बांधल ई जगत, यहिविधि आवैजाई ॥
मानुष जन्महि पाइनर, काहे को जहँडाइ ॥ ६ ॥
अल्पसौख्यदुखआदिहुअंता। मनभुलानमैगरमैमंता ॥ १ ॥
सुखबिसरायमुक्तिकहँपावै।परिहरिसांचझूठनिजधावै ॥ २॥
अनलज्योति दाहै यकसंगा।नयननेह जसजरैपतंगा॥३॥
जौने संसारमें अल्प तो सुखहै औ आदिहूमें अंतहूमें दुःखहै ऐसे संसारमें
मैगर मैमंताकहे मतवारो हाथी जो मन सोभुलाईकै मैमंताकहे मेंहीं ब्रह्महौं या
मानिलियो अथवा मैंहीं देहहौं या मानिलियो॥१॥सुखरूप जे साहब हैं तिनकों
बिसराइ कै कबीरजी कहैहैं कि मुक्ति कहां पावै सांचको छोड़िकै झूठ जो
धोखा ब्रह्महै तामें तो धावैहै यह जीव कैसे सुखपावै ॥ २ ॥ अनलज्योतिजो
ब्रह्महै सो एकसंग सब ज्ञानिनको दाहैहै अग्नि ब्रह्मको नाम है 'अज्ञातवह्निनामा
सौ' ॥ कैसेदाहैहै जैसे नयननेह कहे देखनके लालचलगे दीपककर्ज्योतिमें पतं-
गजरैहैं ॥ ३ ॥
करुविचारज्याहिसबदुखजाई।परिहरिझूठाकेरिसगाई॥ ४ ॥
लालचलागेजन्मसिराई।जरामरण नियरायलआई॥ ५ ॥
झूठ जो या धोखा ब्रह्महै औ अपनो कलेवर तौनें की सगाई त्यागिकै
परमपुरुष जे श्रीरामचन्द्रहैं तिनको बिचारकरु जाते तेरे सब दुःख जाइँ ॥४॥
धोखा ब्रह्मके लालच में लगे कि, हमारी मुक्ति होयगी हमको विषयही तें
सुख होयगो याहीमें लगेलगे जन्मसिरायगयो जरा जो बुढ़ाई औ मरण सों
नियराय आयो ॥ ५ ॥
साखी ॥ भ्रमको बांधल ई जगत, यहि बिधिआवैजाय ॥
मानुषजन्महि पायनर, काहेकोजहँडाय ॥ ६ ॥
यही रीतिते भ्रमको बांधा या जगत है वही ब्रह्मते आवै है कहे उत्पन्न
होइहै औ जाइहै कहे लीन होइ है 'मानुष जन्महि पायनर काहेको जहँडाय'