कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंबीजककी-अनुक्रमणिका। (९)
विषय. पृष्ठ.
रंगहिते रंग उपजै ... ५३९
जाग्रत रूपी जीवहै ... ५३९
पांचतत्व लै ईतन कीन्हा ५४०
पांचतत्व के भीतरे ... ५४०
अशुन तख्त अडि आसने ... ५४०
हृदया भीतर आरसी .... ५४१
ऊंचे गांव पहाड़ पर ... ५४१
जेहि मारग गै पंडिता ५४१
हे कबीर तैं उतरि रहू ५४१
घर कबीर का शिखर पर ५४२
बिन देखे वह देशकी ५४२
शब्द शब्द सब कोई कहे ५४२
पर्बत ऊपर हर बसै ... ५४२
चन्दन बास निवारहु ... ५४३
चंदन सर्प लपेटिया... ... ५४३
ज्योंमुर्दाद स्मसान शिल ... ५४३
गही टेक छाडे नहीं .... ५४४
चकोर भरोसे चन्द्रके (नोटमें)* ५४४
झिल मिल झगरा झूलते ... ५४४
गोरख रसिया योगके ... ५४५
बन ते भागि विहडे पडा ... ५४५
बहुत दिवस ते हींठिया ... ५४५
कबिरा भर्म न भाजिया .... ५४६
बिनु दांड़े जग दांडिया .... ५४७
- यह दूसरी पुस्तकों की ४१ वीं साखी
है किन्तु इस टीकामें नहीं लीहै मैंने नोटमें
दै दियाहै ।
विषय. पृष्ठ.
मल्यागिरिके बासमें वृक्षरहा-
सबगोय ... ... ५४७
मल्यागिरि के बासमें वेधा-
ढाकपलास ... ... ५४७
चलते चलते पगु थका ... ५४७
झालि परे दिन आथये ... ५४८
मन तो कहै कब जाइये ... ५४८
गृही तजिके भये उदासी ५४९
रामनाम जिन चीन्हिया .... ५४९
जेजन भीगे राम रस ... ५४९
काटे आम न मौरसी ... ५५०
पारस रूपी जीव है ... ५५०
प्रेम पाटका चोलना ... ५५०
दर्पण केरी गुफामें... ... ५५१
ज्यों दर्पण प्रति बिम्ब देखिये ५५१
जो बन सायर मुञ्झते ... ५५१
दोहरा तो नवतन भया ... ५५२
कबिरा जात पुकारिया ... ५५२
सबते सांचा है भला ... ५५३
सांचा सौदा कीजिये.... ... ५५३
सुकृत वचन मानै नहीं .... ५५४
लागी आग समुद्र में ... ५५४
लाई लावन हारन की .... ५५४
बुंद जो परा समुद्र में .... ५५४
जहर जिमीं दै रोपिया ... ५५५
दौ की डाही लकड़ी ... ५५५
विरह की ओदी लकड़ी ... ५५५
विरह बाण जेहि लागिया .... ५५६