कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंरमैनी। ( ७७ )
अथ अठारहवींरमैनी।
चौपाई।
अद्भुत पंथ वरणिनहिं जाई । भूले रामभूलिदुनियाई॥१॥
जो चेतौतौ चेतुरे भाई । नहिंतो जिय जरि मूलै जाई॥२॥
शब्द न मानै कथै विज्ञाना । तातेयम दीन्ह्यो है थाना॥३॥
संशय साउज बसै शरीरा।ते खायल अनवेधल हीरा॥४॥
साखी ॥ संशय सारज देह में, संगहि खेल जुआरि ॥
ऐसा घायल वापुरा, जीवन मारै झारि ॥ ५ ॥
अद्भुत पंथ वरणि नहिं जाई।भूलेराम भूलिदुनियाई ॥१॥
जो चेतौ तौ चेतुरे भाई । नहिंतो जियजरिमूलैजाई ॥ २॥
अद्भुत पंथ जो ब्रह्म ताको वर्णतकोईने अंतनहींपायो राम जो साहबहैं तिनके
भूलेकहे बिना जानेते सब दुनिया धोखा ब्रह्म मायामेंभूलिगई १ हे भाइउ
चेतौतौ चेतौ नहीं तौ मायाब्रह्मकी आगिमें जरिकै मूलतेजाउगे । यह कबीर-
जीकहै हैं । नहीं तौ यम जीव लैजाइ जो यहपाठहोयतौ यहअर्थहै कि चेतौतौ
चेतौ नहीं तौ यम लैजायके नरकमें डारिदैँगे ॥ २ ॥
शब्द न मानैकथै विज्ञाना । तातेयमदीन्ह्योहैथाना॥ ३ ॥
संशय साउज बसै शरीरा । तेखायलअनवेधलहीरा ॥४॥
बिज्ञानहूको सार जाते सबशब्द निकसे हैं ऐसो जोरामनाम ताको तौ मानै-
नहीं है और और मतिमें लगिकै विज्ञान कथै है ताते यमराज जो जैसो
कर्मकरैहै ताको तैसो नरक स्वर्गकोथान देयहैं ३ संशयरूपी साउज जो
मन सो शरीररूपी बनमें बसिके अनबेधलकहे जाकोयश रामनाममें नहींहै ऐसो
जो हीराजीव ताको खायगयो कौनीरीतिते खायो सो आगे कहै हैं ॥ ४ ॥