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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 127

( ७६ ) बीजक कबीरदास ।

मानुष बड़े बड़े ह्वै आये । एकै पण्डित सबै पढ़ाये ॥ ६ ॥
कसाई जे गुरुवालोग तिनकी बनाई पोथी सोई छुरीहाथमें लीन्हे यह
ताके हैं कि कैसेहुकै कौन्यो मतको आवै तौ ठगिकै अपनेमतमें कैकेइँ माथ काटिलै
कहेमूंड़िडारै चेलाकरिलैं । सो साहबको छोड़ाइ औरे आरम लगाबनवारो हैं
सो गुरू कसाई है । यहौ द्वैत ज्ञानवाले गुरुवालोग जीवनको गलाकाटें हैं जो
संसारमें रहतो तो कबहूं दैवयोगते साधु सङ्गमभयो उद्धारहू होतो सो तौने
धोखा ब्रह्ममें लगायदियो जहांते उद्धार नहीं है वहां काहेको कोई साहबको
बतावेंगे ॥ ५ ॥ मनुष्य जे बड़ेबड़े ज्ञानीलोग हैं ते यही पढ़ावतभये कि एक
वही ब्रह्महै जीवनहींहै और कोई या पढ़ाया कि एकजीवही सांच है और सब
असांचहै ॥ ६ ॥
पढ़नापढ़हुधरहुजनिगोई।नाहींतौनिश्चय जाउविगोई ॥७॥
जौनपढ़ना तुम गुरुवालोगनतेपढ़योह