कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंरमैनी । ( ६९ )
यकसे शम्भूपंथचलाया । यकसे भूतप्रेत मनलाया ॥ ६ ॥
यकसेपूजाजौनविचारा । यकसेनिहुरिनेवाजगुजारा ॥७॥
यकसेकहे एकजो माया सबलित ब्रह्माताहीको प्रतिपादन करत वेदको
अर्थ बदलिकै महादेवजीको तामसमत चलावतभये और यकसे कहेएक जो-
माया सबलित ब्रह्माताहीको प्रतिपादनकरत जीवनको मन भूत प्रेतदेव सब
लगायदेतेभये अर्थात् माया में अरुझाय देतेभये ६ यकसे कहे एक जो माया
सबलित ब्रह्म ताके ज्ञानहेतु निहुरिकै मुसलमानलोग नेवाज गुजारतभये ॥७॥
कोउकाहूको हटा न माना । झूठाखसमकबीरनजाना॥८॥
तनमन भजिरहुमेरेभक्ता । सत्य कबीर सत्यहैवक्ता ॥ ९ ॥
कोऊ काहूको हटको न मानतभये झूठाजो धोखा ब्रह्म ताही को दृढ़करि-
कै कायाके बीरजे जीव ते नाना देवतनसोते खसम जानतभये । कोई महीं
ब्रह्महौं या मानतभये । खसम जो परमपुरुष मैंहौंताको तुमसब न जानतभये ८॥
तनमनते मोहींमें लगो तबही तिहारो उबारहोइगो सोहे कबीर जीवो
एकतो तुम सत्यहौ और एक जो तिहारे समुझावन वाला वक्ता मैं सो सत्यहौं
और सबझूठे हैं वही ब्रह्म चारों ओर हैगयो है यह द्वैमत दिखायो तामें प्रमाण
( सत्यमात्मा सत्यजीवो सत्यंभिदः ) ॥ ९ ॥
आपुहिदेवआपुहीपाती । आपुहिकुलआपुहिहैजाती॥१०॥
सर्वभूतसंसारनिवासी । आपुहिखसमआपुसुखरासी॥११॥
कहतेमोहिंभयेयुगचारी । काकेआगेकहौंपुकारी ॥ १२ ॥
औवही माया सबलित ब्रह्म आपुही देवता हैगयौहै आपुही फूलपातीहैं
आपुही पूजा करनवालो है आपहीकुल जातिहै १० सोयाभांतिते वहीब्रह्म सर्व-
भूतमें निवासी हैकै आपुही खसमहै रह्यौहै औ जामें पुरुषके सुखको सांचहै
ऐसी सुखराशी नारीहै रह्यौहै ११ सो यह बात चारों युगमोंको कहतभयो
काके आगे पुकारिकै कहा कोई समुझै या धोखा ब्रह्मको नहीं देखोपरे ॥१२॥