कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ६८ ) बीजक कबीरदास ।
बलिराजाको छल्यो है सो या ब्राह्मण जोमाया सबलित ब्रह्म सो कौनको काजकीन्हों
है अर्थात् नहीं कीन्हों है ॥ २ ॥
ब्राह्मणहीसबकीन्होंचोरी।ब्राह्मणहीकोलागीखोरी ॥ ३ ॥
वहीब्रह्म सबकी चोरीकियो है काहेते कि मायातो जड़है यह चैतन्यहै
ब्रह्मही माया सबलितहै मायहूको कर्ताके मेरेसांचेज्ञानको संसारमें शंकादिक
पदार्थ बनाइ चोराइराख्योहै सो जब व्यापकरूप ते सबपदार्थ ब्रह्महीठहरचो
औब्रह्महीके संयोगते मायाकर्ता भई है तब ब्रह्महीको खोरिलगी कि वही
सब करैहै ॥ ३ ॥
ब्रह्महिकीन्हों ग्रंथ पुराना । कैसेहुकैमोहिंमानुषजाना ॥ ४ ॥
वहीमाया सबलित जो ब्रह्महै ताहीते सब वेदपुराण निकसेहैं ताहीते ना-
नामतभये कोई निराकार ब्रह्मही कोई चतुर्भुज कोई अष्टभुज इत्यादि मानत-
भये । तुम सब बसहु जो निर्गुण के सगुणपरे वेदपुराणको तात्पर्यताको जा-
निकै ऐसो मेरो मनुष्य रूप कैसेहुकैकह जसतसकै कोई बिरलेसंत जानै हैं
और नहीं जानै हैं अथवा मोको सब बातके जनैया श्रीरामचन्द्रको सांच मनु-
ष्यरूप है तामें प्रमाण ॥ ( आत्मानंमानुषंमन्ये रामंदशरथात्मजम् ) ॥
इति और जे नानापंथ वेदतेनिकसे तिनको आगे कहैं ( दशतिसर्पानि-
तिदशः गरुड़ः सरथोयस्यसः दशरथः विष्णुः सएव आत्मजोयस्यसः
दशरथात्मजः तं ) ॥ ४ ॥
यकसेब्रह्महिपन्थचलाया । यकसेहंसगोपालहिगाया ॥ ५ ॥
यकसे कहे एकजो माया सबलित ब्रह्म ताही को भतिपादन करत ब्रह्मैनां-
ना शास्त्रके नानापंथ चलावतभये । औ यकसे कहै एक जो माया सबलित
ब्रह्मताहीको बिचारकरत हंसजो जीव सो गोपालहि गावतभये अर्थात् गोजो-
इंद्रिताको पालनवारो जो मनताहीको गावतभये अर्थात् मन्मुखी पंथ चलावत्
भये औ ब्रह्माने वेदकह्योहै वेदते सबमत निकसेहैं जीवनको जोजुदेकरि कै
कह्यो सोमेरे सम्मुखको जो अर्थ है ताको छपाय दीन्हों वेद अर्थ नानादेवतन
यज्ञादिमें लगायदीन्हे ॥ ५ ॥