कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें(८) बीजककी-अनुक्रमणिका ।
विषय. पृष्ठ.
मैं आयो मेहतर मिलन तोहि ४८५
बुढ़िया हंसि कहै मैं नितही वारि ४८७
तुमबूझहु पण्डित कौनि नारि ४८९
माइ मोर मानुष है अति सुजान ४९०
घरहि में बाबू बड़ी रारि ४९१
कर पल्लवके बल खेलै नारि ४९४
ऐसो दुर्लभ जात शरीर ४९५
सबही मदमाते कोई न जाग ४९६
शिव काशी कैसी भई तुम्हारी ४९७
हमारे कहल के नहिं पतियार ४९९
॥ इति बसंत ॥
॥ अथ चाचर ॥
खेलत माया मोहिनी जेर कियो
संसार ... ... ५०१
जारहु जगको नेहरा मन बौराहो ५०५
॥ अथ बेली ॥
हंसा सरवर शरीर मह हो
रैमैया राम... ... ५०९
मन सुस्मृति जहडाइहु हो
रैमैया राम.... ... ५१३
॥ इति बेली ॥
॥ विरहुली ॥
आदि अंत नहिं होत, विरहुली ५१७
॥ हिंडोला ॥
भर्म हिंडोला झूले सब जग आय ५२०
बहुविधि चित्र बनायके हरि
रच्यो क्रीडा रास ... ५२३
विषय. पृष्ठ.
जहं लोभ मोहके खंभा दोऊ ५२४
॥ इति हिंडोला ॥
॥ अथ साखी ॥
जहिया जन्म मुक्ताहता ५२५
शब्द हमारा तू शब्द का ५३१
शब्द हमारा आदिका ५३२
शब्द विना श्रुति आंधरी ५३३
शब्द शब्द बहु अंतरहीमें, ५३३
शब्दे मारा गिर गया ५३४
शब्द हमारा आदिका ५३४
जिन जिन सम्बल ना कियो ५३४
ई हई सम्बल करिले ... ५३४
जो जानहु जिय आपना ... ५३६
जो जानहु पिव आपना ५३५
पानी प्यावत क्या फिरो ... ५३५
हंसा मोती बिकानियां ... ५३६
हंसा तुम सुबरण बरण ... ५३६
हंसा तूतो सबल था ... ५३६
हंसा सरवर तजि चले ५३७
हंसा बक एक रंग लखिये ५३७
काहे हरिणि दूबरी ... ५३७
तीनलोक भौ पींजरा ... ५३८
लोभे जन्म गवांइया .... ५३८
आधी साखी शिर खंडै ५३८
पांचतत्व का पूतला युक्ति रची-
मै कीय ... ... ५३९
पांचतत्व का पूतला मानुष-
धरिया नाउँ ... ... ५३९