कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंरमैनी । ( ६७ )
अथ चौदहवींरमैनी ।
गुरुमुख । चौपाई ।
बड़सो पापीआयगुमानी । पाखंडरूपछलोनरजानी ॥ १ ॥
वामनरूप छल्योवलिराजा।ब्राह्मणकीन कौनसोकाजा॥२॥
ब्रह्मणही सबकीन्होंचोरी । ब्राह्मणहीको लागी खोरी ॥ ३ ॥
ब्राह्मण कीन्होग्रंथ पुराना । कैसेहुकैमोहिं मानुषजाना॥४॥
यकसे ब्रह्मै पंथ चलाया । यकसेहंस गोपालहिगाया ॥ ५ ॥
यकसे शंभू पंथ चलाया । यकसे भूतप्रेत मनलाया ॥ ६ ॥
यकसे पूजा जौन विचारा । यकसेनिहुरिनेमाजगुजारा ॥७॥
कोई काहूकोहटा न माना । झूठा खसमकबीरन जाना ८॥
तनमनभाजिरहु मेरे भक्ता । सत्यकबीर सत्यहै वक्ता ॥९॥
आपुहिदेवआपुही पाती । आपुहिकुलआपुहिहैजाती॥१०॥
सर्वभूतसंसार निवासी । आपुहिकुसुमआपुसुखरासी॥११॥
कहतेमोहिंभये युगचारी । काके आगे कहौं पुकारी ॥१२॥
साखी ॥ सांचो कोई न मानई, झूटाके सँगजाय ॥
झूठेझूठा मिलिरहा, अहमक खेहाखाय ॥ १३ ॥
बड़ोसोपापी आयगुमानी । पाखँडरूपछलोनरजानी ॥ १ ॥
वावनरूपछल्योवालिराजा।ब्राह्मणकीनकौनकरकाजा ॥२॥
साहब कहैहैं तै बड़ोपापी है बड़ोगुमानी है काहेते कि मैं येतो समझाऊंहीं तैं
नहीं समझैहै सो मैंजान्यो पाखंडरूप, जो धोखा ब्रह्मताते हेनर ! तुमछलेगये
और जिनको छल्यो तिनको कहैहैं १ वहीमाया सवलित ब्रह्म बामनरूप करिकै