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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

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रमैनी । ( ६५ )
सहज विचारत मूलगँवाई । लाभतेहानिहोयरेभाई ॥ ५ ॥
सहजकहे सोहंसअहं यह प्रतिश्वास बिचारतबिचारत सबको मूल जोमेरो
नाम ताको गँवाय दियो अर्थात् भुलायदियो सो हे जीवौ ! तुमको तौ धोखा
ब्रह्मकी लाभभई परन्तु यह लाभते मेरे जाननेवाला जो ज्ञान ताकी हे भाइयो !
हानिह्वैगई अर्थात् नहा प्राप्तभई ॥ ५ ॥ अबयोगिनको कहै हैं।
ओछीमती चन्द्रगो अथई । त्रिकुटीसंगमस्वामीबसई॥६॥
तवहाँविष्णुकहासमझाई । मैथुनाष्टतुमजीतहुजाई ॥ ७ ॥
वीर्यकी उलटी गतिकरतकरत ओछीमतिकहे बुद्धयादिकसूक्ष्म है थिरह्वैगई
तब चन्द्ररूप जो वीर्य्य सो अथैगयो अर्थात् उलटी गतिह्वैगई तब दूनौनेत्रकों
उलटिकै ध्यानलगाय प्राणके साथ वीर्य्यको चढ़ाय त्रिकुटीमें जहां इड़ा पिंगला
गंगा यमुना सरस्वतीको सङ्गममें स्वामीबसैहै जहां पहुंचौहौ तब लक्ष्मीनारा-