कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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रमैनी । ( ६३ )
आजुकाजाजियकालिहअकाजा।चलेलादिदिग्गंतरराजा॥४॥
सहज विचारत मूल गँवाई । लाभतेहानि होय रे भाई॥५॥
ओछी मती चन्द्रगो अथई । त्रिकुटीसंगमस्वामी वसई॥६॥
तबहींविष्णु कहासमुझाई । मैथुनाष्ट तुमजीतहु जाई ॥७॥
तवसनकादिकतत्वविचारा। ज्योंधनपावहिरंक अपारा ॥८॥
भोमर्याद बहुत सुखलागा । यहिलेखे सबसंशयभागा॥९॥
देखत उत्पति लागु न बारा । एकमरै यककरै विचारा॥१०॥
मुये गये की काहु न कही । झूटी आश लागि जबरही॥११॥
साखी ॥ जरत जरत से बाचहू, काहेन करहु गोहारि ॥
विषविषयौकैखायहु, रातदिवसमिलिझारि॥ १२ ॥
नहिंपरतीतिजोयहि संसारा।द्रव्यकचोटकठिनकोमारा॥१॥
साहब कहैहैं यह तो उपदेश हमकरते हैं तुमसबको परतीति