कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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जन्मत मरतरहौहौ अथवा अहंब्रह्म अहंब्रह्म अहमीश्वरः अहंभोगी अहंसिद्धः
अहंबलवान् अहंसुखी इहै भूंकैहै तामें प्रमाण॥ (ईश्वरोऽहमहंभोगी सिद्धोऽहंबल-
वान्सुखी)॥ इत्यादिक स्यार जो बाणी ताते एकौकाज नहींभयो अर्थात् जौनी
बाणीकेदेखाये प्रतिबिम्बदेख्यो अनुभव ब्रह्ममान्यो तौनेकेकाज न भयो जनन
मरण न छूट्यो अथवा हे जीवो ! तुम जे कूकुरहौ ते स्यार शिवा भवानी रुद्राणी
अमरमें लिखैहैं सो हे जीवो ! सोई स्यार रूपजो बाणीहै ताको देखिदेखि भूंकतेहौ
कहे पढ़तेहौ वा स्यार रूपबाणीके धरिबेकोतौ भूंकिभूंकि तुमहीं मरिगये
स्यारते कार्य न भयो अर्थात् स्यारूप जोबाणी सोतुम्हारीधरी न धरिगई वाको
तात्पर्य्यार्थको न जानतभये वृत्तितौनहीं राखौहौ अपने जानपनीको घमण्डराखौ
हौ तातेमायाते न छूटे ॥ ६ ॥