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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 112

रमैनी । ( ६१ )
ब्रह्महीमाने औ वैष्णव जेहैं विष्णुके दास तौनेके एकै मानतभये कि दास भाव
करत करत जब अंतःकरण शुद्धहोइगो तब अभेदई भावहोइगो आपही विष्णु
मानेगो काहेते कि देव ह्वैकै देवताकी पूजा करिबेको होई है यह शास्त्रमें लिखा
है ताते हम विष्णुही ह्वैजाइँगे तौने दृष्टांत देइहैं कि वहै तौ बनैहै वहै रखवार
तौ कैसे पूरपरै माया ब्रह्म ईश्वर ई सब मनके कल्पित हैं मनै है औ यही म-
नको रक्षक मानै अथवा ब्रह्मज्ञान को रक्षक मानै है सो वही तौ भ्रम है औ
वही को रक्षक मानै है सो कैसे पूरपरैगो ॥ २ ॥
जोरिकिसानकिसानीकरई । उपजैखेतबीजनाहींपरई ॥३॥
जैसे सिगरी सामग्री जोरि किसान किसानी करै है जौनबीजखेतमें बोवैहै
सोई उपजैहै । तैसे हेजीवो तुमसब नानाबाणीको बिस्तार करि नानामतनमें
लाग्यो सोईफल भयो मेरो जो रामनाम बीजै सोतौखेतमें परबई नं कियोमेरो-
ज्ञानफल कहांतहोय तुम्हारे खेतमेंनानामतनको फल संसार उपज्यो ॥ ३ ॥
छांड़िदेहुनरझेलिकझेला । बूड़ेदोऊगुरू अरु चेला ॥ ४ ॥
तीसरबूड़े पार्थ भाई । जिनवन दाह्यो दवालगाई ॥ ५ ॥
सो हे नरौ! झेली का झेला तुमछांड़ि देहु। धोखा ब्रह्ममें लागिकै तुममाया
को झेला चाहौहौ, माया तुम्हींको झेलैहै या नहींजानौहौ कि, धोखा ब्रह्ममाया
सबलितहै ताही मायाकी धारमें गुरु जे तुमको उपदेश किये ते औ तुमदोऊ
बूड़े ४ पृथु बिस्तारे धातुहै अपने ज्ञान दवाग्निको बिस्तार कैकै अपने सेवकन
केजे बनरूप कर्म जारि अपनेलोकनको लैगये ऐसे जे इष्टदेवता जिनको गुरुवा
लोग उपदेश करैहैं सो हे भाई तीसर तेऊ मायाकी धारमें बूड़े काहेते महाप्रल-
यमें वोऊ नहीं रहिजायँगे ॥ ५ ॥
भूंकिभूंकिककूरमरिगयऊ । काजनएकस्यारसोंभयऊ॥६॥
हे नरौ ! जैसे कूकुर शीशाके महलमें अपनारूप देखि भूंकि भूंकि मरिजायहै
तैसे तुम्हारोई अनुभव जो धोखा ब्रह्म तामें लगि भूंकि भूंकिकहे शास्त्रार्थ करिकरि