सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

पृष्ठ 111, कुल 766 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 111

( ६० ) बीजक कबीरदास ।
अथ बारहवीं रमैनी ।
चौपाई ।
माटिक कोट पषाणकताला । सोई बनसोई रखवाला १
सो बनदेखत जीवडेराना । ब्राह्मण विष्णुएक करिजाना २
जोरि किसान किसानी करई । उपजै खेत बीज नहिंपरई ३
त्यागि देहु नर झोलिक झेला । बूड़े दोऊ गुरु अरु चेला ४
तीसर बूड़े पारथ भाई । जिन बन दाह्यो दवा लगाई ॥५॥
भूँकि भूँकि कूकुर मरिगयऊ । काज न एकस्यारसौं भयऊ ६
साखी ॥ मूसबिलारी एकसँग, कहु कैसे रहिजाय ।
यक अचरज देखौ संतौ, हस्ती सिंहहिखाय॥७॥
माटिककोटपषाणकताला । सोईबनसोईरखवाला ॥ १ ॥
माटीका कोट यहशरीरहै मनरूप पाषाणका तालौहै कठिनभ्रमजौनेते माया
औ धोखा ब्रह्ममें लग्योहै सोई भ्रमके बनको नानाबाणीमाया ताको रक्षक सोई
भ्रमही है जबभ्रम मिटै तब माया धोखाब्रह्म तबहीमिटै संसारताला खुलै तबमैं
सर्वत्र देखपरों ॥ १ ॥
सोबनदेखतजीवडेराना । ब्राह्मणविष्णुएककरिजाना ॥२॥
तौन जो भ्रमको वनहै संसार नानाशास्त्र तिनके द्वारा देखिके डरानजाय नाना
मतनमें तुम सब नहिंपारपाये कि कौनमतलैकै संसार पारहोई ये शास्त्र एक म-
तनहीं कहैंहैं तब डेराय ब्राह्मण भये ॥ ब्रह्मजानातिब्राह्मणः ॥ सब ब्रह्मको
जानतभयेः वैष्णवजेहैं ते एक व्यापक तुमसब विष्णुही को मानतभये व्याप्य
पदार्थ न मानतभये सो हेजीवो! जो व्याप्य पदार्थ नै होयगो तो व्यापक कामें
होयगो ताते एक मानिबो धोखई है । अथवा ब्राह्मण जेहैं ब्रह्मज्ञानी ते एक