कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंरमैनी । (५९)
मुक्त ह्वैजायहै औ तिनके लोकमें जाय सुख पावैहै । वास्तव एकही नाम भेद-
से और और कहैहै या भांतिते जे ज्ञान राखेहैं तिनके ज्ञानको मेरे अनिर्वचनीय
नामरूप धामके जे जनैया हैं तिनके ज्ञानको ते विषयी मानै हैं ॥ ८ ॥
कहाभयेनलसुधवेसूझा । बिनपरचै जगमूढ़ न बूझा ॥९॥
मतिकेहीनकौनगुणकहई । लालचलागेआशारहई॥१०॥
ऐसे बे सूझ जीवजिनको नहीं सूझपरैहै ते कहां शुद्धभये, नहीं भये।मैं जो अनिर्व-
चनीय ताकेपरचै बिना जगमें मूढ़जीवो तुम न बूझत भयो सो ऐसे मतिके हीन जे तुम
तिनके कौनगुण कहैं लालचईमें लागेरहैहैं काहूको द्रव्यकीआशा काहूको
ब्रह्मज्ञानकी आशा काहूको नाना देवतनकी आशा काहूको विषयकी आशा में
फिरैहै सांचजोवेद को अर्थ मैं ताको न जानतभये अर्थात् साहबकहैहै कि मोको
न जानोगे तो कबहीं बचोगे नहीं, तो वेद पुरान कहैहै कि,
सब मरिजाहुगे ॥ ९ ॥ १० ॥
साखी ॥ मुवा अहै मरिजाहुगे, मुयेकी बाजी ढोल ॥
स्वप्नस्नेही जगभया, सहिदानीरहिगाबोल ११॥
साहबकहैहै कि हेजीवौ मुवाजोधोखा ब्रह्म नानादेवतातिनमें जो लागौगे
तोमरिजाहुगे अथात् जनमतैमरत रहौगे यातुम्हारे मुयेकी ढोल जो वेदपुराणहै
सो बाजैहै कहे कहैहैं । तब तुम्हारा इष्टदेवन को स्नेह औ सबसुख जगत्को
स्वप्न ऐसा ह्वैजायगा ये सब मुयेहैं ये वेदपुराण तात्पर्यते डंका दैकेकहैहैं अथवा-
जोगुरुवालोग ब्रह्मको नाना देवतनमें लगावै है सो सबसंसारमें मुये की ढोल बा-
जैहै । मरिजाहुगे जो यामें लगौगे तो तुम्हारी सहिदानी बोलरहिजायगा । बोल
कहाहै जे तुम अपने इष्टदेवनके ग्रन्थबनाय जावगे तेई रहिजायँगे कि फलानेकेबना-
ये ग्रन्थहै कालपाय वोहूं न रहिजायँगे अथवा सहिदानी बोल रहिजायगा कौन
जौन मेरे रामनामको संसारमुख अर्थ करि संसारी भयोहै सोइजगत्की सहिदा-
नी मेरोनाम रहिजायगो ताहीको फेरि संसारमुख अर्थकरि संसारी होउगे जब
नाममें मोको जानोगे तबहीं मुक्त होउगे ॥ ११ ॥
इतिग्यारहवीं रमैनी समाप्तम् ।