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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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बीजककी-अनुक्रमणिका । ( ७ )
[ स्तम्भ १ ]
विषय. पृष्ठ.
कका कमल किरनि में पावे ४२५
खखा चाहै खोरी मनावे ४२५
गगा गुरुके वचनहि मान ४२६
घघा घट विनशे घट होई ४२६
ङङा निरखत निशिदिन जाई ४२७
चचा चित्र रचो बहु भारी ४२७
छछा आहि छत्रपति पासा ४२८
जजा ई तन जियतहि जारो ४२८
झझा अरुझि सरुझि कित जाना ४२९
ञञा निर्खत नगर सनेहू ४२९
टटा विकट बात मन माहीं ४३०
ठठा ठौर दूरी ठग नियरेँ ४३०
डडा डर किन्हे डर होई ४३१
ढढा ढूढ़तही कित जाना ४३१
णणा दूरि बसो रे गाऊं ४३१
तत्ता अति त्रियो नहिं नाये ४३२
थथा थाइ थहो नहिं जाई ४३२
ददा देखहु विनशनि हारा ४३३
धधा अर्ध माहिं अंधिआरी ४३३
नना वो चौथे मह जाई ४३४
पपा पाप करे सब कोई ४३४
फफा फल लागो बढ़ दूरी ४३५
बबा बर बर करे देख सब कोई ४३५
भभा भरम रहा भर पूरी ४३५
ममा सेये मर्म न पाई ४३६
यया जगत रहा भर पूरी ४३६
ररा रारि रहा अरुझाई ४३७
लला तुतुरे बात जनाई ४३७
[ स्तम्भ २ ]
विषय. पृष्ठ.
ववा वह वह कर सब कोई ४३८
शशा शर नहिं देखै कोई ४३८
षषा षरा कहै सब कोई ४३९
ससा सरा रच्यो बरियाई ४३९
हहा होय होत नहिं जाने ४४०
क्षक्षा क्षण परलय मिटिजाई ४४०
॥ इति चौतीसीं ॥
॥ अथ बिप्रमतीसी ॥
सुनहु सबन मिलि बिप्र मतीसी ४४१
॥ अथ कहरा ॥
सहज ध्यान रहु सहज ध्यान रहु ४४७
मत सुनु माणिक मत सुनु माणिक ४५५
राम नाम को सेबहु बीरा ४५९
ओढ़न मेरो राम नाम ४६०
रामनाम भजु रामनाम भजु ४६२
राम नाम बिनु राम नाम बिनु ४६७
रहहु सम्हारे राम विचारे ४७१
क्षेम कुशल और सही सलामत ४७३
ऐसन देह निरापन बौरे ४७४
हौं सबहिन में हौं नाहीं ४७५
ननदी गे तैं विषम सोहागिन ४७८
ईमाया रघुनाथ की बौरी ४८०
॥ इति कहरा ॥
॥ अथ बसंत ॥
जहं बारहिं मास बसंत होय ४८१
रसना पढ़ि भूले श्री बसंत ४८३