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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

पृष्ठ 106, कुल 766 में से

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पृष्ठ 106

बहतभये । करगी बूड़ाकोजलजो छिटकैहै ताको कहैहैं। सो यह माया ब्रह्मको जो
धोखारूपबूड़ाहै ताकेआवतमें काहुनकही कियाधोखाब्रह्ममेंनपरोबूड़िजाउगे ॥१॥
आईकरगीभोअजगूता । जन्मजन्मयमपहिरेबूता ॥ २ ॥
जब करगी आई तब अयुक्ति होत भई कैसी भई कि, जन्म जन्म कहे जब
जब ब्रह्मांडनकी उत्पत्तिभई तब तब यम पहिरे बूता कहे यमको काल
निरंजन जैहैं तिनको बूता कहे पराक्रम काल पहिरत भयो अर्थात् काल
तो जड़है निरंजनै को पराक्रम लैके जीवनको मारैहै ॥ २ ॥
बुतापहिरियमकीनपयाना। तीनिलोकमोकीन समाना॥३॥
बांधे ब्रह्मा विष्णु महेशु । पार्वती सुत वांधगणेशू ॥ ४ ॥
वँधेपवनपावकनभनीरू । चंद्रसूर्य बाँधे दोउबीरू ॥ ५ ॥
वही निरंजन को बुताकहे पराक्रम काललैके पयान कियो सो लव दिन
पक्ष मास वर्ष युग कल्परूप करिकै तीनलोकमें समाइ जातभयो ॥ ३ ॥ जौन
काल तीनलोकमें समानो ताहिमें ब्रह्मा विष्णु महेश षण्मुख गजमुखादि आयुर्दा-
य प्रमाण रूपते सब बँधतभये ॥ ४ ॥ अरु ताहिमें पवन औ पावक औ
पानी औ चन्द्र सूर्य नभ सब बँधत भये ॥ ५ ॥
सांचमंत्र सबबांधे झारी । अमृत वस्तु न जानै नारी ॥६॥
झारादैके जे साहबके सांचमंत्रहैं तिनहूको काल बांधिलियो काहेते कि जो
साहबके मंत्रको अर्थप्रभाव सोई आवरण है औ साहबको ज्ञानरूप अमृत वस्तु
जानि परत भये नारी जो आवरणकैलियो माया तामेंपरे जे जीव ते न जानैं
जो जानैंगे तौ हमारेमारे न मरेंगे याही हेतुते बांध्योहै ॥ ६ ॥
साखी ॥ अमृत वस्तु जानै नहीं, मगन भये कित लोग॥
कहैकबिरकामोनहीं, जीवहमरन न योग ॥ ७ ॥
अमृत बस्तु जो साहब है ताको तो न जान्यो कौने कुत्सित संसारमें तू
मगन भयो कौन साहब जो कामोनहीं अर्थात् काममें नहीं है सबहीमें है सो