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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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रमैनी । (४९)
जहियाहोतपवननहिंपानी। तहियासृष्टिकौनउतपानी॥१॥
तहियाहोतकलीनाहिंफूला। तहियाहोतगर्भनाहिंमूला ॥२॥
जहिया कहे जेहि समय सृष्टि नहीं रही जेहि समय न पवन रह्यो न पानी
रह्यो तब सृष्टिको कौन उत्पन्नकियो १ न तब कली रही न फूल रह्यो अर्थात्
न बालरह्यो न वृद्धरह्यो न गर्भरह्यो न गर्भको मूलबीज रह्यो ॥ २ ॥
तहियाहोतनविद्यावेदा । तहियाहोतशब्दनाहिंखेदा ॥ ३॥
तहियाहोतपिंडनहिंवासू । नाघरधरणिनगगनअकासू॥४॥
तहियाहोतगुरुनहिंचेला । गम्यअगम्यनपंथदुहेला ॥ ५ ॥
न वेदरह्यो न चौदहौ विद्यारहीं न शब्द रह्यो न खेद कहे दुःखरह्यो ३
न पिंडरह्यो न पिंडमें जीवको बासरह्यो न अधरकहे पातालरह्यो ना धरणिरही
न आकाश रह्यो ४ न गुरुरह्यो न चेला रह्यो न गम्यकहे सगुणरह्यो न अगम्य
कहे निर्गुणरह्यो औ दुहेला कहे दोनोंपंथ नहींरहे ॥ ५ ॥
साखी ॥ अविगतकीगतिक्याकहौं, जाकेगाँउनठाँउ ॥
गुणविहीना पेखना, काकहिलिजै नाँउ ॥ ६ ॥
वह जो अविगतकहे अव्यक्त जो नहीं प्रकटहोय, धोखा ब्रह्म है निराकार
ताकेगाँव ठाँउ नहीं है वह गुणकरिकै विहीन जो निर्गुणहै ताको पेखना कहे
देखिबेको का कहिकै नामलीजै कि यहहै वातो कुछवस्तुही नहीं है ॥ ७ ॥
इति सातवीं रमैनीसमाप्तम् ।
अथ आठवीं रमैनी ।
( वेदांत विचार )
तत्त्वमसी इनके उपदेशा । ईउपनिषद कहै सन्देशा ॥ १ ॥
उनिश्चय उनकेबड़भारी। वाहिकिवर्णकरै अधिकारी ॥२॥
परमतत्त्वकानिजपरमाना।सनकादिकनारदसुखमाना ॥३॥
४