कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ५० ) बीजक कबीरदास ।
याज्ञवल्क्यऔजनकसँबादा । दत्तात्रयी वहै रसस्वादा ॥४॥
वहै वसिष्ठ राममिलि गाई । वहै कृष्णऊधवसमुझाई ॥५॥
वहै बात जो जनक दृढाई । देहै धरे विदेह कहाई ॥ ६ ॥
साखी ॥ कुल अभिमाना खोयकै, जियत मुवा नहिं होय॥
देखत जो नहिं देखिया, अदृष्ट कहावै सोय ॥७॥
तत्त्वमसी इनके उपदेशा । ईउपनिषद कहै संदेशा ॥ १ ॥
तैने धोखा ब्रह्मको जौनी रीतिते गुरुवालोग उपनिषद्को प्रमाणदैकै प्रतिपादन
करै हैं सो, औ सांच जो अर्थहै सो कबीरजी दोऊ तात्पर्य करिकै देखावै हैं ।
तत्त्वमसी जो श्रुति उपनिषद्को उपदेश ताको गुरुवालोग संदेश ऐसो कहैं हैं
संदेश कौन कहावै है कि बातको पूर्वापर नहीं समुझै वाकी कहनूति वासों कहि
देइँ जो संदेशको हेतुपूछै कि कौनेहेतुते कह्यो है तो वह कहै हैं कि संदेश
कहि दियो यह नहीं जानै हैं कि कौन हेतु ते कह्यो है सो ऐसे गुरुवा लोग
श्रुति को तो पूर्वापर जानै नहीं हैं अक्षर मात्रको अर्थ करैं हैं कि तत्त्वं ब्रह्मत्व
असि तौन ब्रह्मतूही है सो जीवहीको अनुमान तौ ब्रह्महै जीव ब्रह्मकैसे होयगो
ब्रह्मतो ज्ञानस्वरूप है शुद्ध है माया कैसे धरिलावती अज्ञानी कैसेहोतो तौ गुरु-
वालोग कहैहैं कि वा अतर्क है तर्क न करो सो जीवहीको अनुमान तौ ब्रह्महै
जीव ब्रह्मकैसे होयगो । सो श्रुतिको अर्थ यहहै कि पूर्वषोडश कलात्मकजीवको
कहिआये हैं ताहीको कहै हैं कि त्वमसिं तौन षोड़श कलात्म जीव है षोड़श
कला तोहीमें हैं तू उनते भिन्न है शुद्ध है यह जीवको स्वरूप लखायो सो नहीं
समुझै हैं सो या बात मेरे तत्त्वमस्यार्थबादमें विस्तारतैहै ॥ १ ॥
ऊनिश्चयउनकेबड़भारी । वाहिकिवरणकरैअधिकारी॥२॥
ऊ कहै वह जो धोखा ब्रह्महै ताहीकी निश्चय उनकेबड़ीभारीहै बाहीकी
वरण कहे वही धोखा ब्रह्मको अधिकारी जे चेलाहैं तिनको वरणकरै है अर्थात्