जगजीवन साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सतनामी सम्प्रदाय)

जगजीवन साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सतनामी सम्प्रदाय)
Jagjivan Sahib Ki Bani: Belvedere Press Allahabad
सन्त जगजीवन साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
DevanagariHindipublished110 पृष्ठ
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बिनती और प्रार्थना ।
करि कुसंग कुमारग डोल्यौ,
निसि बासर अभिमाना ॥ १ ॥
नहिं मति मोरि कहौं मैं कहँ लगि,
तुम सब कृपा-निधाना ।
मोहिं सिखाई पढ़ाइ दृढ़ावहु,
तबहिं धरौं मैं ध्याना ॥ २ ॥
मैं बपुरा केतनि किन माहीं,
करि नहिं सकौं बखाना ।
जगजीवन पर दाया करिये,
गुरु निरखै निरबाना ॥ ३ ॥
॥ शब्द १२ ॥
साँई जब तुम मोहिं बिसरावत ।
भूलि जात भौजाल जगत माँ,
मोहिं नहीं कछु आवत ॥ १ ॥
जानि परत पहिचान होत जब,
चरन सरन लै आवत ।
तब पहिचान होत है तुम ते,
सूरति सुरति मिलावत ॥ २ ॥
जो कोइ चहै कि करौं बंदगी,
बपुरा कौन कहावत ।
चाहत खैंचि सरन ही राखत,
चाहत दूरि बहावत ॥ ३ ॥
हौं अजान अज्ञान अहौं प्रभु,
तुम ते कहि कै सुनावत ।
जगजीवन पर करत हौ दाया,
तेहि ते नहिं बिसरावत ॥ ४ ॥