जगजीवन साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सतनामी सम्प्रदाय)
Jagjivan Sahib Ki Bani: Belvedere Press Allahabad
सन्त जगजीवन साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२ जीवन-चरित्र
साहब उनसे पीछा छुड़ाने के लिये सरदहा गाँव को छोड़ कर कोटवा में जा रहे। कहते हैं कि
उनके जाते ही सरदहा गाँव को सरजू नदी बहा ले गई।
कोटवा में जगजीवन साहब की समाध और सातवीं गद्दी अब तक मौजूद है और हर
साल उन के पंथ वालों और साधारण लोगों का बड़ा भारी मेला होता है पर और पुराने मतों
की तरह इस में भी अब सच्चे अभ्यासी देख नहीं पड़ते।
जगजीवन साहब गृहस्थ आश्रम में थे। उन के विषय में कितने चमत्कार प्रसिद्ध हैं जिन
में से एक यह है कि उन की लड़की का ब्याह राजा गोंडा के लड़के से ठहरा। जब बरात आई
समधी ने बिना मास के भोजन करने से इनकार किया। इस पर जगजीवन साहब ने मौज से
बैंगन की तरकारी बनवा दी जिसे सब बरातियों ने मांस समझ कर बड़ी रुचि से खाया। इसी
कारन उनके पंथ वाले बैगन को मास के तुल्य समझ कर उस को नहीं खाते।
जगजीवन साहब पूरे संत थे जिन की ऊँची गति उनकी बानी पुकारती है। संपूर्ण बानी
रत्न-जटित है जिस के अंग अंग से भेद, दीनता और प्रेम टपकता है और पाठ करने से चित्त
गद्गद होकर प्रेम के घाट पर आ जाता है। इनके गुरू बुल्ला साहब की बानी भी बड़े ऊँचे
घाट की और अत्यन्त कोमल है जो छप गई है।
जगजीवन साहब का अति मनोहर ग्रंथ शब्द-सागर है जिस का पहिला भाग यह है जो दो
लिपियों से मिलान करके अंगों के क्रम अनुसार भरसक बहुत शुद्धता के साथ छापा गया है।
दूसरा भाग भी जिस मे और और अंग हैं अब छप गया है।
इस के सिवाय पादरी जान टामस लिखते हैं कि जगजीवन साहब के दो ग्रंथ ज्ञानप्रकाश
और महाप्रलय और हैं। इन ग्रंथों को हमने नहीं देखा है। पहिली पुस्तक के विषय मे पादरी
साहब कहते है कि वह महादेव और पारवतीजी के बीच प्रश्नोत्तर के रूप में है पर उस का विषय
क्या है यह नहीं बतलाया—जाहिर में जैसा कि नाम से जान पड़ता है ज्ञान पर सम्बाद होगा।
दूसरी पुस्तक में इस तरह चर्चा की है कि भक्त जन सब के बीच में रह कर सब से अलग है,
वह सब जानता है किसी से पूछने का मुहताज नहीं है वह न जनमता न मरता है न सीखता
न सिखाता है, न रोता न पछताता है, उस को न दुख व्यापता है न सुख, न न्याय न अन्याय,
इत्यादि—फिर पूछा है कि ऐसे पुरुष का कोई पता बतला सकता है।
जगजीवन साहब के गुरमुख चेले दूलमदास जी थे जिन का नाम प्रसिद्ध है।
श्रीमन्त राजारामजी बड़ागाँव जिला बलिया की कृपा से हम को जगजीवन साहब के गुर-घराने
की बंशावली का वृक्ष मिला है जो यहाँ छापा जाता है। उससे जान पड़ेगा कि कैसे-कैसे भारी
भक्त और महात्मा इस गुर-घराने में हुए हैं, और पलटू साहब जिन की अद्भुत कुंडलियाँ और
शब्दावली हम छाप चुके हैं और भीखा साहब जिन की शब्दावली जो छप गई है घरानेके थे।
नोट :—बंशावली तथा सूची भीतरी टाइटल पेज के पीछे देखिये।