जगजीवन साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सतनामी सम्प्रदाय)
Jagjivan Sahib Ki Bani: Belvedere Press Allahabad
सन्त जगजीवन साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंबिनती और प्रार्थना । ७
जगजीवन दास बिनती करि,
बिनवै सीस चरन तर धरई ॥ ४ ॥
॥ शब्द १५ ॥
प्रभु जी तुम जानत गति मेरी ।
तुम ते छिपा नहीं आहै कछु,
कहा कहौं मैं टेरी ॥ १ ॥
जहँ जहँ गाढ़ पर्यो भक्तन कां,
तहँ तहँ कीन्ह्यो फेरी ।
गाढ़ मिटाय तुरन्तहि डारयो,
दीन्ह्यो सुख घनेरी ॥ २ ॥
जुग जुग होत ऐसै चलि आवा,
सो अब साँझ सबेरी ।
दियो जनाय सोई तस जानै,
बास मनहिं तेहि केरी ॥ ३ ॥
कर औ सीस दियो चरनन महँ,
नहिं अब पाछे हेरी ।
जगजीवन के सतगुरु साहब,
आदि अंत तेहि केरो ॥ ४ ॥
॥ शब्द १६ ॥
प्रभु बिन किरपा भक्ति न होय ।
कर्म अघ तेहि मेटि डारयो, मंत्र सिखयो सोय ॥ १ ॥
तिरथ बरत करि तपस्या, डारि यहु तन खोय ।
नाहि लाहत नाम रस बहु, नाहिं दृढ़ता होय ॥ २ ॥
कोटि तीर्थ अस्नान करि कै, सैन रहे समोय ।
ऐस करि कै बिचार नाहीं, रहे मन मन रोय ॥ ३ ॥