हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें७६ हिन्दुत्व
और श्रेष्ठताका दर्शक — "राष्ट्रमार्यस्यचोत्तमम्" का परिचायक
माना गया, उस नामको कोई कैसे छोड़ सकता है ? जिस नामके
लिये हमारे शत्रु हमारा तिरस्कार करते थे और जिसके लिये
हमारे शूरवीर योद्धा शालिवाहनसे शिवाजीतक महान्से महान्
पराक्रमी पुरुष शताब्दियोंतक लड़ते रहे, वह नाम यही है—
हिन्दु। यही हिन्दु नाम पद्मिनी और चित्तौड़ की अस्थियोंपर खुदा
था। यही हिन्दु नाम तुलसीदास, तुकाराम, रामकृष्ण और
रामदासने अपनाया था। हिन्दुपदपादशाहीका ध्यान ही तो
रामदासका ध्यान था, शिवाजीका यही व्रत था, बाजीराव और
बन्दा बहादुर, छत्रसाल और नानासाहेब, प्रताप और प्रतापा-
दित्यकी महत्त्वाकांक्षाओंका यही तो ध्रुव तारा था। यही नाम
उस झंडेपर अंकित था जिसकी रक्षामें एक दिनमें एक लाख
हिन्दू वीर, शत्रुओंको मारते हुए, पानीपतके मैदानमें खेत रहे और
उनके अग्र भागमें वीराग्रणी भाऊ भी हाथमें खड्ग लिये असि-
धारा तीर्थमें निमज्जित हुआ ! और इस बलिदानके पश्चात् भी,
इस बलिदानके फलस्वरूप नाना और महादजी इसी हिन्दूपद-
पादशाहीके लिये आंधी और तूफानकी कोई परवा न कर, चट्टानों
और आपदाओंको टालते हुए राष्ट्र-नौकाको उसके किनारेके
समीपतक खे ले गये थे। और आज भी यही "हिन्दू" और "हिंदु-
स्थान" नाम नेपालके राजसिंहासनसे राहके भिखारीकी झोली
तक करोड़ों मनुष्योंपर अपना प्रभुत्व चला रहा है। इस नामका
तिरस्कार करना अपनी जातिके हृदयको ही काटकर फेंक देना