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हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 91, कुल 167 में से

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पृष्ठ 91

हिन्दुत्वके तीन लक्षण ७५
पुराने जखमोंके ये चिह्न हैं। जखम भरकर अच्छे हो गये पर
उनके ये चिह्न बाकी हैं और ऐसा मालूम होता है कि ये हमारे
शरीरके साथ ही रहेंगे। इन चिह्नोंको नखोंसे खरोचकर मिटानेकी
चेष्टा करनेमें जबतक हानिके सिवाय कोई लाभ नहीं, तबतक
जो कुछ कर सकते हैं वह यही है कि इनको सह लें; क्योंकि ये
चिह्न भी तो आखिर उसी रक्तरंजित रणभूमिमें लगे हुए जखमोंके
हैं जिसने हमींको जयमाल पहनायी थी।
फिर भी यदि कोई ऐसे शब्द हैं जो चाहे हमारे देव-
मन्दिरोंके नामोंसे भी कितने ही सम्बद्ध क्यों न हों पर जिन्हें
त्याग देने या बदल देनेकी जरूरत है तो वे शब्द ये ही हैं; क्योंकि
ये स्पष्ट ही विदेशी शब्द हैं और विदेशी प्रभुत्वके ही अवशेष
स्वरूप हैं। जो लोग इन नामोंको न केवल सह लेते बल्कि प्यार
करते हैं वे हिन्दु या हिन्दुस्थान नामको छोड़ देनेकी पुकार
मचायें, क्या यह कुछ अप्रामाणिकसी बात नहीं है?—वह नाम
जो हमारी जाति और देशका, हमारे पूर्व पुरुषों द्वारा रखा हुआ
नाम है, जो संसारके सबसे प्राचीन और सबसे पूज्य ग्रन्थ वेदोंमें
आया है—वह नाम जिसे सिन्धु नदीके दोनों ओर बसनेवाले
हमारे करोड़ों देश-भाई अधिक नहीं तो कमसे कम विगत ४०
शताब्दियोंसे धारण किये हुए हैं, जिस नाममें काश्मीरसे कन्या-
कुमारीतक और अटकसे कटकतक हमारे समग्र देशका अन्तर्भाव
होता है, जो नाम एक शब्दमें हमारी जाति और देशकी भौगो-
लिक स्थितिको प्रकट कर देता है, जो नाम अपनी विशिष्टता