हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहिन्दुत्वके तीन लक्षण ७७
है। ऐसा करनेके पूर्व ही तुम मर जाओगे। ऐसा करना केवल
प्राणान्तक ही नहीं बल्कि असाध्य साधन है। “हिन्दु” और
“हिन्दुस्थान” इन शब्दोंको उनके स्थानोंसे अलग करनेका ख्याल
हिमालयको ही उसके स्थानसे हटानेके समान है। भयानक और
कल्पनातीत उत्पात और उलटफेर करनेवाला कोई भीषण
भूकंप ही यह काम कर सकता है।
हिन्दु और हिन्दुस्थान इन नामोंपर जो यह मिथ्या आक्षेप
है कि ये नाम विदेशियोंके रखे हुए हैं, यदि यही एक बात हो
तो इसका समाधान निर्विवाद ऐतिहासिक प्रमाणोंसे ही अना-
यास हो सकता है। पर बात यह है कि इस आक्षेपके साथ कुछ
लोगोंके दिलमें एक गुप्त भय भी है। वे यह समझते हैं कि
यदि यह नाम हम अपनाते हैं तो यह समझा जायगा कि हम
उन सब बातोंको माननेवाले हैं जो “हिन्दू धर्म” के नामपर
प्रसिद्ध हैं। कोई इस भयको स्पष्ट रूपसे प्रकट करे या न करे,
पर इस भयसे बहुतसे लोग यह बात माननेको तैयार नहीं होते
कि यह नाम विदेशियोंका रखा हुआ नहीं है। यह भय बिल-
कुल निराधार है, यह बात भी नहीं। परन्तु जिन्हें इस प्रकारकी
आशंका होती है उन्हें वैसा स्पष्ट कहकर बतलाना चाहिये कि
अमुक कारणसे हम हिन्दू कहलानेको तैयार नहीं हैं—मिथ्या और
निराधार आक्षेपके बहाने वस्तुस्थितिको छिपाना कदापि उचित
नहीं। “हिन्दुत्व” और “हिन्दू धर्मसंप्रदाय (हिन्दुइज्म)” ये
दो शब्द आपाततः एक दूसरेके समान हैं और इससे अनेकोंका