हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंवरमें अपने रूपकी परछाईं देखो, तो देखोगे कि तुम वही आर्य-
सिंह हो जो संसारके अन्य बड़े बड़े राष्ट्रोंके नामशेष होनेपर
भी, अबतक जीते हो ; जो युगयुगान्तरोंसे विद्या, वैभव और
पराक्रमके प्रकाशसे संसारको शिक्षा, दीक्षा और दंड देते चले
आ रहे हो ! हां, इन अगणित वर्षोंके इतिहासमें इधर हजार-बारह
सौ वर्ष तुम्हारे कभी दासत्वमें और कभी उस दासत्वको नष्ट
करनेके प्रयत्नमें बीते हैं ! पर यह हजार बारह सौ वर्षका इति-
हास ही तुम्हारा इतिहास नहीं है, इसके पूर्व न जाने कितने
हजार वर्ष तुम्हारे पराक्रमके प्रखर प्रकाशमें बीते हैं। और इन
हजार-बारह सौ वर्षका इतिहास भी तुम्हारे दासत्वका इतिहास
नहीं, बल्कि दासत्वको नष्ट करनेके लिये संग्रामपर संग्राम करते
रहनेका ही इतिहास है। यह इसी कालका इतिहास है कि अरबके
रेगिस्तानसे रेतीके कणोंके समान असंख्य अरब आक्रमणका-
रियोंने ईरान, शाम, फिलस्तीन आदि देशोंमें रहनेवाली जातियों-
को निःशेष कर मुसलमान बना डाला और उसी विजयोन्मादकी
अप्रतिहत लहरें छठी शताब्दीके अन्तमें सिन्धुके तट-प्रदेशपर
आकर गिरने लगीं, तब तुम्हीं तो थे जिन्होंने वहीं उन्हें रोक
रखा। और किस देश या जातिने यह नमूना संसारको दिखाया
कि पृथ्वीको पादाक्रांत करते चले आते आक्रमणकारियोंसे इस
तरह जूझे कि दस-बीस वर्ष नहीं, सौ-पचास भी नहीं, चार सौ
वर्षतक उन्हें सिन्धमें अटके रह जाना पड़ा, आक्रमणकारी आगे
नहीं बढ़ सके ? संसारमें और कोई शक्ति जिसे नहीं रोक सकी,