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सर्वकोश
हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 8, कुल 167 में से

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पृष्ठ 8

Uploaded By Rajesh Tanti.

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ही हिन्दू-संगठनका आधार है। जिस दिन हिन्दू-जातिके प्रत्येक
समाजमें यह चैतन्य - यह सत्य - जाग उठेगा कि हम सबसे
पहले हिन्दू हैं और हिन्दुत्व ही हमारा प्राण है, उस दिन हिन्दू-
संगठन सिद्ध हो जायगा - उस दिन हिन्दू-जाति इतनी बलवान
होगी कि संसारका कोई संघ या गुट उसका सामना नहीं कर
सकेगा।
इस समय-हिन्दू जातिपर संकट है। पर संकटकाल ही
जागरणका काल है, जब अपने आपको भूले हुए हिन्दू अपने
आपको पहचानने लगते हैं। अपने आपको भूलनेसे ही संकट
आ घेरता है और अपने आपको पहचाननेसे ही संकट दूर हो
जाता है। जब जब हिन्दू-जातिपर संकट आया है और जब जब
उसने उस संकटसे पार पाया है, तब तब उसने अपने आपको
पहचाननेका परिचय दिया है और आत्मस्मृतिको जगाकर
विराट् हिन्दू-जातिने एक होकर अपने अस्तित्वकी रक्षा की है,
अपनी संस्कृतिसे दूसरोंको भी लाभ पहुँचाया है। हिन्दू-जातिके
इस जागरणका इतिहास प्रस्तुत पुस्तकके “हिन्दवानेकी ढाल”
प्रकरणमें अपनी दिव्य झलक एक बार दिखाकर यह बता जाता
है कि हिन्दुओ ! कहाँ भटक रहे हो ? किस सोचमें डूबे हो ?
क्या तुम दुर्बल हो ? क्या तुम फूटके बीज हो ? क्या तुम
सदासे दूसरोंकी गुलामी करते आये हो ? नहीं, नहीं, यह
सारा भ्रम है; तुम्हारी सिंहशक्तिको उभरने न देनेके लिये यह
जाल बिछाया गया है; जरा अपने इतिहासके स्वच्छसरो-