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सर्वकोश
हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 10, कुल 167 में से

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॥६
उसे रोका तो हिन्दू-जातिने ही रोका और उस जमानेमें रोका
जब दैव प्रतिकूल था। सिन्धपर आक्रमण करनेके पश्चात् चार
सौ वर्षतक मुसलमान सिन्ध और मुल्तानके आगे न बढ़ सके।
इस समय मुसलमानोंने सारे यूरोपको पादाक्रांत करके स्पेन
देशमें अपना झंडा फहराया था, पर हिन्दुस्थानमें उन्हें सीमापर
ही ४ सदियोंतक लड़ना पड़ा। अन्तको दसवीं शताब्दीके
अन्तमें और ११ वीं शताब्दीके आरंभमें महमूद गजनी पश्चिमो-
त्तर सीमा लांघकर हिन्दुस्थानमें घुसा। उसने बारह बार आक्रमण
किया। बार बार हारनेपर भी हिन्दूओने उसके सामने सिर नहीं
झुकाया, उससे युद्ध ही बराबर करते रहे, और महमूद गजनी-
को सोमनाथकी लूटके बाद हिन्दू राजा भीमदेवकी सेनाके
भयसे सिन्धके रेगिस्तानके रास्ते हिन्दुस्थानसे भाग जाना पड़ा-
सम्मुख युद्धमें उसका साहस नहीं था जो सामना करता। मह-
मूद गजनीके साथ ये जो युद्ध हुए, इनमें समग्र हिन्दू-राजा संघ-
टित होकर नहीं लड़े, यद्यपि उनमें हिन्दुत्वका भाव था। वे संघ-
टनकी आवश्यकता अनुभव नहीं करते थे। एक-एक राजा इतना
बलशाली था कि संगठनका किसीको ध्यान नहीं रहा और
इसका परिणाम यह हुआ कि सिन्धपर आक्रमण होनेके ४ सौ
वर्ष पश्चात् आधा पंजाब प्रान्त मुसलमानोंके अधिकारमें चला
गया। पर अधिकारमें चला गया इसका यह मतलब नहीं है कि
मुसलमानोंका स्वामित्व स्वीकार करके हिन्दू हाथपर हाथ धरके
बैठ गये। इसके बाद ११६१ में महम्मद गोरीने भारतपर चढ़ाई