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सर्वकोश
हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

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पृष्ठ 74, कुल 167 में से

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५८ हिंदुत्व
सो भी इसलिये कि जिसमें मुसलमानोंकी विजय हो, चित्त
अत्यन्त उद्विग्न हो उठा—वीरोंका उत्साह भंग होने लगा ! शिवाजी
जयसिंहसे कहते हैं—"आप जो किले चाहते हों, मैं देनेके लिये
तैयार हूं। उनपर आपका झण्डा चढ़ाता हूं। पर मुसलमानोंको
यश मत दो। मैं हिन्दू हूं। आप राजपूत हैं; इसलिये आप भी
हिन्दू ही हैं। असलमें राज हिन्दुओंका ही है। हिन्दू धर्मरक्षकके
सामने सौ बार मैं अपना मस्तक झुकाऊंगा। पर हिन्दू धर्म
अपमानित हो, ऐसा कभी नहीं हो सकता।
जयसिंहपर इसका असर हुआ और उन्होंने जवाब दिया—
"औरंगजेब बादशाह पृथ्वीपति हैं। उनसे आप मैत्री कर लें।
शत्रुत्व करके इस कालमें निबाहना नहीं हो सकता। हम हिन्दू
जयपुरके राजा हैं। आप भी हिन्दू ही हैं। आप हिन्दू धर्म
स्थापन करते हैं, इसलिये हम आपके अनुकूल हैं।"
शिवाजीके अधीन हिंदुओंका जो उत्थान हुआ, उससे हिंदु-
स्थानके समस्त हिंदुओंमें नवजीवनका सञ्चार हो गया था।
पीड़ित जाति उन्हें अवतार और रक्षक मानती थी। सावनूरके
हिंदुओंने मुसलमानोंके अत्याचारोंसे त्रस्त होकर देखिये किस
प्रकार उन्हें पुकारा है,— "यह यूसुफ बड़ा दुष्ट है। स्त्रियों और
बच्चोंपर अत्याचार करता है। गोवध आदि निंद्य कर्म करता है।
हमलोग इसके राज्यमें बहुत ही तंग आ गये हैं। आप हिन्दूधर्मके
संस्थापक हैं, म्लेच्छोंके नाशक हैं; इसलिये आपकी शरणमें
आये। हमलोग आपके पास आये इसलिये हमारे द्वारपर पहरा