हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहिन्दवानेकी ढाल ५६
खड़ा है। अन्न-जलके बिना हमें मार डालना चाहते हैं। इसीलिये
रातका दिन करके (बहुत जल्द) आइये।”
इसके बाद फिर जब शिवाजीने तंजोरकी जागीर अपने भाई
व्यंकोजीको इस शर्तपर लौटा दी कि वह मुसलमान बादशाहका
सार्वभौमत्व न माने तब शिवाजीने लिखा है—“दुष्ट हिन्दु-
विद्वेषियोंको अपने राज्यमें न रहने दें।”
स्वातंत्र्ययुद्धमें संताजी और उनके भाइयोंने जो पराक्रम
किया उसका यथा-उचित सत्कार करनेके लिये राजाराम महा-
राजने जो महान् और अभिमानास्पद पदवी दी वह पदवी थी
“हिन्दुराव”। जब जिंजिके किलेको शत्रुओंने मजबूतीसे घेर
लिया था तब उस घिरावको तोड़नेके लिये मुगल सेनापतिके
अधीनस्थ मराठे सैनिकोंको फोड़ लेनेका प्रयत्न किया गया—
“गुप्तरूपसे नागोजी राजाके साथ बातचीत की गयी कि हम और
आप यदि एक हो जायं तो यह सेना नष्ट करके हिन्दू-धर्मकी रक्षा
कर सकेंगे। इसलिये आप मुसलमानोंका पक्ष त्यागकर हमारे
पक्षमें आ मिलें।” तब नागोजी राजा मुसलमानोंकी नौकरी
छोड़कर, ५ हजार फौजके साथ शहरमें गये……शिर्के
मुगलोंके ताबेदार बने (कारण संभाजीने शिर्कोंको कतल कराया
था)। तब खण्डो बल्लालने कहा, “जिस प्रकार आपके परिवार-
वालोंका कतल कराया उसी प्रकार हमारे भी तीन पुरुष हाथीके
पैरोंतले कुचलवा कर मारे गये। परन्तु हिन्दुओंके राज्यके लिये
हम उद्योग कर रहे हैं और इसमें आप भी हिस्सेदार हैं।” तब