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हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

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४४ हिन्दुत्व
अकस्मात् आक्रमण किया। उस दिनसे जो संग्राम आरम्भ हुआ
वह कई शताब्दियोंतक जारी रहा और हिन्दुस्थान अकेला लड़ता
रहा—युद्ध नैतिक क्षेत्रमें भी था और रणक्षेत्रमें भी। नैतिक क्षेत्रमें
जो संपत्ति मुसलमानोंकी छिन गयी उसे लौटा लानेके लिये औरं-
गजेबने पागलपनका उद्योग आरम्भ किया। उससे रणक्षेत्रमें भी
उनकी हार होनेका दिन और भी निकट आ गया। अन्तको भाऊ-
साहेबने मुगलोंकी राजधानीका छत्र भङ्गकर उसके टुकड़े टुकड़े
कर डाले, पानीपतका दिन उदय हुआ, हिन्दू उस खास लड़ाईमें
हारे, पर दीर्घ कालसे चले आये हुए संग्राममें जीते। फिर किसी
पठानने दिल्लीपर आक्रमण करनेकी हिम्मत नहीं की। हिन्दुओंकी
जो विजय वैजयंती मराठोंने अटकमें फहरायी उसे हमारे सिख
और आगे बढ़कर सिन्धु पार करके काबुलके तटपर फहरा आये।
इस दीर्घकालीन संग्राममें हिन्दुओंको इस बातकी पूरी पह-
चान हुई कि हम हिन्दू हैं और यह हिन्दूराष्ट्र ऐसा अखंड बन
गया कि इसके पूर्व ऐसी अखंडता नहीं देखनेमें आयी थी। यह
स्मरण रहे कि हम समग्र हिन्दूजातिकी बात कह रहे हैं, किसी
खास संप्रदाय या पंथकी नहीं। सनातनी, सतनामी, सिख, आर्य,
अनार्य, मराठे, मद्रासी, ब्राह्मण और पंचम—सब हिन्दूके नाते हारे
और हिन्दूके नाते जीते। क्या मित्र और क्या शत्रु—दोनों, और
सब नामोंको दबाकर हिन्दू और हिन्दुस्थान—इन नामोंको बढ़ानेमें
सहायक हुए। आर्यावर्त और दक्षिणापथ, जंबुद्वीप और भारत-
वर्ष—इन नामोंमें हिन्दुओंकी उस राजनीतिक और सांस्कृतिक