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हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

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पृष्ठ 59

हिन्दवानेकी ढाल ४३
धार कुन्द होती गयी। प्रत्येक चोट पहलेसे अधिक गहरी हुई,
पर फिरसे वार करनेके लिये खड्ग उस जखमसे निकालकर ज्योंही
ऊपर उठाया जाता त्योंही घाव भर जाता। वार करनेवालेकी
जीवनी शक्तिसे वार सहनेवालेकी जीवनी शक्ति अधिक प्रमा-
णित हुई। संग्राम बराबरीवालोंमें नहीं था। किसी एक जाति
या राष्ट्रके साथ हिन्दुस्थानको नहीं लड़ना पड़ रहा था। प्रायः
समस्त एशिया आक्रमणकारी सेनाके पीछे खड़ा था और
उसके पीछे लगभग सारा यूरोप था। अरबोंने सिन्धमें
प्रवेश किया। अकेले वे इससे अधिक और कर ही क्या सकते
थे ! कुछ कालके बाद वे अपने ही देशकी स्वाधीनताकी
रक्षा नहीं कर सके और इसके बाद अरब जातिका नाम भी नहीं
सुना गया। परन्तु यहां अकेले हिन्दुस्थानको अरबों, ईरानियों,
पठानों, बलूचियों, तारतरों, तुर्कों और मुगलोंका सामना करना
पड़ा—सहारेके रेगिस्तानने मानों मानवी सेनाका रूप धारण
किया था और उसमें अकेले फंसे हुए हिन्दुस्थानपर सारी दुनि-
याका तूफान उठा था ! "धर्म" में गति देनेकी बड़ी भारी शक्ति
है। लूटमारमें भी ऐसी ही शक्ति है। परन्तु जहां धर्मपर लूटमार-
का अंकुश रहता है और धर्मके नामपर लूटमार होती है वहां इन
दोनोंके संयोगकी शक्ति बड़ी ही भयानक होती है और उसका
परिणाम भी वैसा ही भयानक होता है—जहांतहां हाहाकार मच
जाता है। स्वर्ग और नरक दोनों एक हो गये थे और बड़ा ही
भयानक रूप धारण कर महम्मदने सिन्धुको पार कर हिंदुस्थानपर