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हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 47, कुल 167 में से

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पृष्ठ 47

हिन्दुस्थान और म्लेच्छस्थान ३१
कितना ही महान् हो, समय बीतनेके साथ क्षीण हो ही जाता है।
जिस नाममें वैयक्तिक गौरव और पराक्रम ही भरा हुआ है, वह
नाम राष्ट्रकी कृतज्ञता-बुद्धि और आत्मगौरव जब बढ़ने
लगता है, तब उस राष्ट्रके चित्तका वैसा समाधान नहीं कर
सकता, जैसा कि कोई ऐसा नाम करे जिसमें राष्ट्रीय पराक्रम भरा
हो, जिसमें राष्ट्रके पूर्व पुरुषोंकी स्मृति संरक्षित हो और इसके साथ
जो कोई उत्तम और स्थायी प्राकृतिक पावन दृश्य नेत्रोंके सामने
उपस्थित करता हो। महाराज भरत आये और चले गये। ऐसे
और भी कितने ही महान् राजा हो गये !—पर सिन्धु अभीतक
वर्तमान है और सदा ऐसी ही वर्तमान रहेगी, हमारी कृतज्ञता-
बुद्धिको सदा इसी प्रकार जगाती और बढ़ाती रहेगी, हमारे
आत्मसम्मानकी इसी प्रकार वृद्धि करती रहेगी, हमारे पूर्वजोंकी
स्मृतिका संचार करती रहेगी—हमारी भवितव्यतापर उसका
पहरा रहेगा। यही हमारे राष्ट्रके कालशरीरका वह मेरुदण्ड
है, जो अति प्राचीनके साथ सुदूर भविष्यका सम्बन्ध रखता
है। जो नाम हमारे राष्ट्रको एक नदीके साथ सम्बद्ध करता
और उसके साथ मिला देता है, वह प्रकृतिको हमारी तरफ ला
देता है और हमारे राष्ट्रीय जीवनको एक ऐसे आधारपर स्था-
पित करता है, जो आधार (जहांतक मानवी दृष्टिकी पहुँच है)
चिरस्थायी है। ये सब बातें हमारे पूर्वजोंके ध्यानमें आयी होंगी
और इन्हींसे प्रेरित होकर उन्होंने हमारे राष्ट्र और देशका नाम
“सिन्धुस्थान” रखा होगा।