हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३० हिन्दुत्व
नहीं था, "फिरसे वेदोंकी स्थापना" की जो पुकार राष्ट्रमें मची
हुई थी उसीका यह स्वाभाविक परिणाम था। वैदिक धर्मके
अधिष्ठानमें जिस वैदिक राज्यकी स्थापना हो, उसका नाम भी तो
वैदिक ही होना चाहिये और क्या यह भी आवश्यक नहीं है कि
नामकरणका प्रकार भी वैदिक ही हो ? ऐसा ही हुआ। पुराणों-
में लेख है कि विक्रमादित्यके पौत्र शालिवाहनने विदेशियोंका
इस देशमें दूसरी बार घुस आनेका प्रयत्न विफल किया और
उन्हें सिन्धु नदीके पार मार भगाकर यह राजाज्ञा घोषित की
कि आजसे आर्य और अनार्य राष्ट्रोंके बीच सिन्धु नदी सीमा
मानी जायगी—
“एतस्मिन्नंतरे तत्र शालिवाहन भूपतिः ।
विक्रमादित्यपौत्रश्च पितृराज्यं प्रपेदिरे ॥
जित्वा शकान् दुराधर्षान् चीनतैत्तिरिदेशजान् ।
बाल्हिकान् कामरूपांश्च रोमजान् खुरजान् शठान् ॥
तेषां कोषान् गृहीत्वाच दण्डयोग्यानकारयत् ।
स्थापिता तेन मर्यादा म्लेच्छार्याणां पृथक् पृथक् ॥
सिन्धुस्थानमितिज्ञेयं राष्ट्रमार्यस्य चोत्तमम् ।
म्लेच्छस्थानं परं सिन्धोः कृतं तेन महात्मना ॥
(भविष्यपुराण प्रतिसर्ग पर्व)
हमारे देशका प्राचीनसे प्राचीन नाम जो ग्रन्थोंमें मिलता है,
वह "सप्तसिन्धु" या "सिन्धु" है। "भारतवर्ष" भी पीछेका
नाम है और यह वैयक्तिक है। व्यक्तिविशेषका गौरव चाहे वह