हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३२ हिन्दुत्व
“सिन्धुस्थान” वैदिक नाम तो है ही, पर इससे एक और
विचित्र लाभ हुआ है । अवश्य ही यह संयोग मात्र है, पर उसकी
उपेक्षा नहीं कर सकते । संस्कृत भाषामें “सिन्धु” केवल सिन्धु
नदीका ही नाम नहीं है, समुद्रका भी है जो दक्षिण द्वीप कलाकी
मेखला—समुद्ररशना—है । इस तरह इस अकेले “सिन्धु”
शब्दके उच्चार-मात्रसे हमारे देशकी चतुःसीमा निर्दिष्ट हो जाती
है । यदि हम इस दन्तकथाको न भी मानें कि पूर्ववाहिनी ब्रह्मपुत्रा
इसी सिन्धुकी शाखा है और इस प्रकार सिन्धु ही हिमाचलके
पश्चिम और पूर्व दोनों उतारोंपर प्रवाहित होती है और इसलिये
हमारी पश्चिम सीमाकी तरह पूर्व सीमा भी सिन्धु ही है—यदि
इस बातको हम न भी मानें—तौभी इसमें कोई संदेह नहीं कि
उत्तर और पश्चिम ओरसे इसी नदीने इस देशको घेरा है और
इसलिये सिन्धुस्थान कहनेसे, सिन्धु-नदीसे सिन्धु (समुद्र)
पर्यन्त हमारी मातृ-भूमिकी सम्पूर्ण प्रतिमा हमारे नेत्रोंके सामने
आ जाती है ।
पर कोई यह न समझे कि “सिन्धु” नाम केवल भौगोलिक सुबीता
देखकर ही ग्रहण किया गया । इस शब्दसे जो भावना उत्पन्न
होती थी, वह केवल भौगोलिक नहीं बल्कि राष्ट्रीय थी । सिन्धुस्थान
केवल एक भूखण्डका ही नाम नहीं था बल्कि एक राष्ट्र था ।
सिन्धुस्थानमें जिस संस्कृतिका प्रचार था, वह “सिन्धु” थी और
सिन्धुस्थानके अधिवासी भी वैदिक कालसे ही “सिन्धु” थे ।
सिन्धुस्थान “राष्ट्रमार्यस्य चोत्तमम्” था और इसके परे विदेशियों-