हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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जाती है। जिस विशाल एकीभवनके उद्योगमें सिन्धुसे समुद्र
पर्यन्त इस संपूर्ण महादेशका समावेश हुआ था और इसे एक
राष्ट्र बना देनेका जिसका लक्ष्य था, उसके लिये "आर्यावर्त"
और "ब्रह्मावर्त" पूर्ण बोधक नाम नहीं थे। प्राचीन ग्रन्थकारोंके
लेखानुसार आर्यावर्त वह देश था जो हिमालय और विन्ध्याके
बीचमें था—"आर्यावर्तः पुण्यभूमिर्मध्यं विन्ध्यहिमालयोः" जिस
अवस्थामें यह नामकरण हुआ उस अवस्थामें यह ठीक भी था;
परन्तु जब आर्यावर्तवासिनी आर्य-जातिने आर्य और अनार्य
दोनोंको मिलाकर एक राष्ट्र निर्माण कर दिया और नतशिखर
विन्ध्याद्रीके भी पार दूर दूरतक अपनी संस्कृतिका प्रचार कर
लिया, तब ऐसी जातिके लिये यह नाम बहुत ही अपूर्ण था।
आवश्यकता थी एक ऐसे नामकी जो भारतीय राष्ट्रकी व्यापक
भावनाका बोधक हो। अत्यधिक रूपमें यह प्रयोजन तब सिद्ध
हुआ जब भरत-वंशका समस्त पृथिवीपर राज हुआ। यह भरत
कौन थे—यह वैदिक थे या जैन थे—अथवा यह कब हुए
इत्यादि बातोंके संबन्धमें कल्पना-सागरमें गोते लगाना छोड़
इतना ही जानना हमारे लिये यहाँ पर्याप्त होगा कि आर्यावर्त
और दक्षिणापथके लोगोंने अपनी मातृभूमिका यह नाम केवल
स्वीकार ही नहीं किया, प्रत्युत इस नामसे अपनी मातृभूमि और
अपनी संस्कृतिके साम्राज्यको पुकारनेमें उन्हें स्नेहपूर्ण आनंद
आता था। ज्यों-ज्यों दक्षिणकी ओर अन्तरिक्षका पट खुल गया,
त्यों-त्यों हम देखते हैं कि जातिके गुरुत्वाकर्षणका केन्द्र सप्त-