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हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 27, कुल 167 में से

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पृष्ठ 27

हिन्दू नामको उत्पत्ति ११
कि राष्ट्रीय और सांस्कृतिक एकताकी भावना ही नष्ट हो गयी
हो, पर इस भावनाने नये नाम-रूप धारण किये। ऐसे नवीन
नाम-रूपोंमें राजनीतिशः सबसे महत्वपूर्ण संस्था “चक्रवर्ती”
की थी। अंतको हिन्दुओंने एक देश और एक राष्ट्र स्थापित
करनेका जो महान् उद्देश्य धारण किया था उसकी भौगोलिक
मर्यादा स्थापित हो गयी, जब राजकुमार रामचन्द्रने विजयी
होकर लंकामें प्रवेश किया और हिमालयसे लेकर समुद्रपर्यन्त
समग्र देश एक राजछत्रके नीचे ले आये। जिस दिन विजयका
अश्व बेरोक अयोध्यामें लौट आया और आदर्श नृपति राजा
रामचन्द्रके सिंहासनपर सार्वभौम राजका श्वेत छत्र लगा तथा
केवल आर्यवंशके राजाओंने ही नहीं प्रत्युत दक्षिणके हनुमान-
सुग्रीव-विभीषणने भी उनका सार्वभौमत्व स्वीकार किया—वही
दिन हमारी हिन्दू-जातिका वास्तविक जन्मदिन था। वास्तवमें
वह हमारा राष्ट्रीय दिन था; क्योंकि आर्य और अनार्य दोनों एक
होकर एक राष्ट्र बन गये। पूर्वके लोगोंने इसके पूर्व जो कुछ
प्रयत्न किये, उन सबका एकीकरण हुआ और राजनीतिशः उन
प्रयत्नोंकी पूर्णता हुई। सबका एक लक्ष्य हुआ, एक राष्ट्रीय
झंडा हुआ, एक ही उद्योग हुआ जिसके लिये इसके बादके लोग
पीढ़ी-दर-पीढ़ी जाने-बेजाने लड़ते और अपने प्राणोंको उत्सर्ग
करते रहे।
एकीभवनकी कोई भी भावना अपने लिये यथोचित
व्यापक और पूर्ण बोधक संज्ञा या नाम पाकर बहुत दृढ़ हो