हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहिन्दू-जातिकी शक्ति १४६
करना हमारा कर्तव्य ही है कि जिससे इस देशके सब लोग हिन्दू,
मुसलमान, पारसी, ईसाई और यहूदियोंके अन्दर यह भाव जाग
उठे कि हम सब पहले हिन्दुस्थानी-भारतवासी हैं और फिर और
कुछ। पर इस ओर हिन्दुस्थानकी जहांतक भी प्रगति हुई हो,
एक बात ऐसी है जिसे भुलानेसे काम न चलेगा। वह बात यही
है कि क्या हिन्दुस्थानमें और क्या संसारके किसी भी देशमें,
किसी राष्ट्रके खड़े होने और ठहरनेके लिये कोई आधारभूमि
होनी चाहिये। यह आधारभूमि क्या है? किसी राष्ट्रका
जीवन उस राष्ट्रके उन नागरिकोंके ही जीवनपर निर्भर करता
है जिनका स्वार्थ, जिनका इतिहास और जिनकी सदभिलाषाएं
उस राष्ट्रके देशके साथ मिली हुई हों। ये ही लोग हैं जिन्हें
हम राष्ट्रकी आधारभूमि कह सकते हैं। उदाहरणार्थ, तुर्कोंको
देखिये। राज्यक्रांति होनेके पश्चात् तरुण तुर्कोंको अपनी
पार्लमेंट और सामरिक संस्थाओंके द्वार आर्मेनियनों और
ईसाइयोंके लिये खोल देने पड़े इस नाते कि ये भी राष्ट्रके
अङ्ग हैं चाहे इनका धर्म-संप्रदाय कुछ भी हो। पर जब सर्विया-
के साथ युद्ध छिड़ा तब ईसाइयों और आर्मेनियनोंके मन
पहले तो चंचल हुए और पीछे उनकी कितनी ही पलटनें शत्रु-
पक्षमें जा मिलीं, क्योंकि राजकीय, जातीय और धार्मिक दृष्टिसे
सर्वियनोंके साथ इनका अधिक सम्बन्ध था। अमेरिकाका उदा-
हरण लीजिये। जब जर्मन महायुद्ध छिड़ा तब जर्मन-वंशके अमे-
रिकन अमेरिका छोड़कर जाने लगे और अमेरिकापर यह एक